माघ मास की गिनती पुण्यदायी मासों में की जाती है। इस माह में पवित्र नदियों में स्नान करके दान करने का बड़ा महत्व होता है, लेकिन कई लोग यह बात नहीं जानते किइस पूरे माह में धार्मिक साहित्य, धार्मिक ग्रंथों का योग्य लोगों को दान करना अति पुण्यदायी होता है। विशेषकर इस माह की अमावस्या, एकादशी और पूर्णिमा के दिन धार्मिक साहित्य का दान अवश्य करना चाहिए।

माघ माह में वैसे तो सभी प्रकार के वेद, पुराण, चालीसा, भगवद्गीता, स्तोत्र आदि की पुस्तकों का दान किया जा सकता है। ये पुस्तकें विशेषकर उन लोगों को दी जानी चाहिए जिनमें कुछ धार्मिक आस्था हो, जो पढ़ने योग्य हों। श्रीमद्भगवद्गीता का दान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। इसके अलावा चारों वेदों, 18 पुराणों में से किसी एक का दान, श्रीभागवत महापुराण, देवी भागवत, दुर्गा सप्तशती, गणपति अथर्वशीर्ष, गणेश पुराण, शिव महापुराण, शिव चालीसा, समस्त देवी-देवताओं के स्तोत्र आदि की पुस्तकें दान करना चाहिए। इन साहित्य का दान करने से देवी-देवताओं को प्रसन्न करने से लेकर पितरों तक का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है। माघ मास में गुप्त नवरात्र आती है इसलिए देवी महापुराण, दुर्गा सप्तशती की पुस्तकों का दान करना चाहिए। पुस्तकों की संख्या अपनी क्षमता के अनुसार तय की जा सकती है।

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