चाणक्य नीति के अनुसान धन की देवी लक्ष्मी जी हैं. लक्ष्मी जी को वैभव और सुख समृद्धि का भी प्रतीक माना गया है. कलियुग में लक्ष्मी जी का आशीर्वाद सभी दुखों का नाश करने वाला माना गया है. यही कारण है हर व्यक्ति लक्ष्मी जी की कृपा पाना चाहता है, लेकिन लक्ष्मी जी की कृपा उन्हीं लोगों को प्राप्त होती है, जो इन बातों को कभी नहीं भूलते हैं-
समर्पण- चाणक्य नीति के अनुसार जो व्यक्ति अपने जिम्मेदारियों के प्रति समर्पित रहता है. समर्पण की भावना से अपने प्रत्येक कार्यों को करता है, उस पर लक्ष्मी जी की कृपा सदैव बनी रहती है.
अनुशासन-चाणक्य नीति के अनुसार अनुशासन की भावना व्यक्ति को सफल बनाती है. अनुशासन की भावना व्यक्ति को समय की अहमियत बताती है. जीवन में समय की कीमत जो पहचानता है, उसे जीवन में सफलता अवश्य मिलती है. अनुशासन से प्रत्येक कार्य को बेहतर ढंग से करने की प्रेरणा मिलती है.
धन का व्यय- चाणक्य नीति के अनुसार व्यक्ति को धन का व्यय बहुत सोच समझ कर करना चाहिए. जो लोग आय से अधिक धन का व्यय करते हैं, वे सदैव धन की कमी से परेशान रहते हैं. लक्ष्मी जी की कृपा ऐसे लोगों को प्राप्त नहीं होती है. धन की बचत और रक्षा करनी चाहिए.धन का प्रयोग कभी गलत कार्यों पर नहीं करना चाहिए. इससे लक्ष्मी जी नाराज होती हैं.
स्वच्छता- चाणक्य नीति के अनुसार जो लोग स्वच्छता के नियमों का पालन करते हैं वे निरोग रहते हैं. जीवन में सफल होने के लिए व्यक्ति का स्वस्थ्य रहना आवश्यक है. स्वस्थ्य रहने के लिए स्वच्छता आवश्यक है. शास्त्रों में भी बताया गया है कि लक्ष्मी जी उस स्थान को कभी नहीं छोड़ती हैं जहां स्वच्छता का ध्यान रखा जाता है.

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