रायपुर (नम्रता वर्मा)। कहा जाता है कि, जो असफलता के दौर में विचलित न हो निरंतर प्रयास करता रहे, वह जरूर लक्ष्य तक पहुंचेगा। सफलता, कड़ी मेहनत और धीरज का प्रतिफल है। उस पर भी लक्ष्य, जब भारतीय सैन्य अधिकारी बनने का हो तो यह परिश्रम कई गुना अधिक बढ़ जाता है।
छत्तीसगढ़ के महासमुंद निवासी तेजस्वी ठाकुर ने इसी परिश्रम के बल पर संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा (सीडीएस) में सफलता हासिल की है। अब वे ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी चेन्नई में सैन्य अधिकारी बनने के लिए प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। प्रशिक्षण उपरांत बतौर लेफ्टिनेंट वे भारतीय सेना में सेवाएं देंगे। तेजस्वी की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने विफलताओं की पूरी श्रृंखला को तोड़कर सफलता का तेज उत्पन्न किया है। तेजस्वी, छठे प्रयास में चयनित हुए हैं।
रोमांचक पेशे में जाना था लक्ष्य, असफलता से डिगे नहीं
तेजस्वी ने दसवीं कक्षा में तय कर लिया था कि, भारतीय सेना में शामिल होना है। वे कॉरपोरेट में बिल्कुल नहीं जाना चाहते थे। तेजस्वी का रुझान रोमांचक पेशे की ओर था। ऐसा जो चुनौतीपूर्ण हो, साथ-ही-साथ जहां मनुष्य का सर्वांगीण विकास भी हो। इस दृष्टि से भारतीय सेना उन्हें सर्वोत्तम लगा। तेजस्वी ने बारहवीं के बाद खड़कवासला, पुणे स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी की प्रवेश परीक्षा दी, पर सफलता नहीं मिली। तब संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा ( सीडीएस) की ओर रुख किया। यह यूपीएससी द्वारा आयोजित स्नातक स्तरीय परीक्षा है। इसमें भी लिखित परीक्षा में उनका चयन हो जाता था, पर इंटरव्यू में वे बाहर हो जा रहे थे। तेजस्वी कहते हैं, “मैं इंटरव्यू में बहुत बार फेल हुआ। फिर यह देखा कि कहां चूक हो रही है और उसे कैसे ठीक किया जा सकता है।” सुधार की दिशा में मेहनत करने पर आखिरकार चयन हो गया।
मां ने जताई थी चिंता, अब वही हैं सबसे ज्यादा खुश
माता-पिता अपने लाडले बेटे की उपलब्धि पर गर्वित अनुभव कर रहे हैं। तेजस्वी अपने परिवार से पहले ऐसे व्यक्ति हैं, जिनका चयन रक्षा सेवाओं के लिए हुआ है। पहले-पहल जब उन्होंने सेना में जाने की बात मां के सामने रखी, तो वे चिंतित हो गईं। फिर बेटे के अटल निश्चय को देखकर मां ने भी पूरा समर्थन किया। आज जब सैन्य अधिकारी प्रशिक्षण के लिए तेजस्वी का चयन हो गया है, तो उनकी मां ही सर्वाधिक प्रसन्न हैं। बारहवीं तक की पढ़ाई महासमुंद से करने वाले तेजस्वी ने, शासकीय नागार्जुन विज्ञान महाविद्यालय, रायपुर से विज्ञान विषय में स्नातक किया है। इसके बाद वे संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा की तैयारी में जुट गए।
परीक्षा के प्रारूप को समझना है जरूरी
परीक्षा की तैयारी के लिए तेजस्वी ने सबसे पहले परीक्षा के प्रारूप को समझा। बीते वर्ष के प्रश्नपत्रों का विश्लेषण किया। इसके आधार पर उन्होंने अपनी परीक्षा की रणनीति बनाई। ऑनलाइन संसाधनों के अलावा कुछ स्तरीय पुस्तकों से प?ाई की। नियमित दो-से-तीन घण्टे की प?ाई के अलावा वे शारीरिक गतिविधियों को भी पर्याप्त समय देते थे। लिखित परीक्षा की तैयारी के लिए तेजस्वी ने किसी प्रकार की कोचिंग नहीं की। इंटरव्यू के लिए राजधानी रायपुर में आयोजित साप्ताहिक कार्यशाला में मार्गदर्शन लिया।
इंटरव्यू में व्यक्तित्व के हर पहलू का होता है परीक्षण
सीडीएस के व्यक्तित्व परीक्षण की प्रक्रिया विभिन्न चरणों में होती है। इसमें मनोवैज्ञानिक परीक्षण, समूह चर्चा से लेकर व्यक्तिगत साक्षात्कार तक सब कुछ सम्मिलित है। तेजस्वी बताते हैं कि, “यह सिर्फ नॉलेज का टेस्ट नहीं है, सम्पूर्ण व्यक्तित्व का परीक्षण है। एक तरफ साइकोलॉजिकल टेस्ट में हमें चित्र देखकर कहानी लिखनी होती है, तो वहीं इंटरव्यू में यह देखा जाता है कि, दबाव की अवस्था में हम कैसी प्रतिक्रिया दे रहे है। भारतीय सेना में टीम वर्क बेहद जरूरी है। इसलिए इंटरव्यू के बाद ग्रुप टास्क में यह भी देखा जाता है कि हम टीम के साथ काम कर पा रहे हैं या नहीं। इंटरव्यू की तैयारी यही है कि हम स्वयं के प्रति ईमानदार रहें और सोचने-समझने का दायरा विस्तृत करें।” भारतीय सेना में अधिकारियों का चयन ऐसे ही स्तरीय चयन प्रक्रिया के माध्यम से होता है। तेजस्वी इसकी मिसाल हैं कि, डटे रहने वाले मेहनती युवा इस चयन प्रक्रिया में जरूर सफल होते हैं।
अथक परिश्रम से दी विफलता को मात, अब बनेंगे भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट
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