महाशिवरात्रि 1 मार्च 2022 मंगलवार को शिव योग में आ रही है। भगवान शिव का पूजन कार्यो में सिद्धि और सफलता के लिए तो किया ही जाता है, लेकिन शिवजी की पूजा सबसे अधिक आयु और आरोग्यता के लिए की जाती है। रोग निवारण का सबसे बड़ा मंत्र महामृत्युंजय मंत्र दुनिया में प्रसिद्ध है। इस मंत्र के समान ही शिवजी के अनेक मंत्र हैं जिनका जाप करके समस्त रोगों का निवारण किया जा सकता है। शिवजी के मंत्रों का जाप करने के लिए वैसे तो कोई दिन निर्धारित नहीं है, इनका जाप और सिद्धि कभी भी की जा सकती है लेकिन सोमवार या महाशिवरात्रि का दिन सबसे विशेष होता है। यदि आप स्वयं या आपके परिवार में कोई बीमार चल रहा है, गंभीर बीमारियों से जूझ रहा है तो इस महाशिवरात्रि पर शिवजी के मंत्रों का जाप कर सकते हैं। यहां पांच विशिष्ट मंत्रों की जानकारी दी जा रही है।
ऊं नम: शिवाय इस मंत्र से हर व्यक्ति परिचित है। यह मंत्र दिखने और जपने में जितना सरल है, उससे लाखों गुना अधिक इसका प्रभाव होता है। यदि सही विधि और उद्देश्य से इसका जाप किया जाए तो यह अपना पूर्ण चमत्कार दिखाता है। इस शिवजी का छह अक्षरों वाला मंत्र है। किसी भी उपासना के अंत में तो इस मंत्र का जाप किया ही जाता है मंदिरों में पूजा करते समय और शिवलिंग पर जल अर्पित करते हुए भी इस मंत्र का जाप किया जाता है। इस मंत्र का अधिक संख्या में जप करना हो तो प्रणव अर्थात् आगे से ऊं हटाकर मात्र नम: शिवाय पंचाक्षरी का जाप करना चाहिए। तांत्रिक साधनाओं में विशेषकर इसी मंत्र का जाप किया जाता है। यह मंत्र मनुष्य को उसकी इच्छित वस्तुएं प्रदान करने में पूर्ण सफल है। इस मंत्र को महाशिवरात्रि के दिन सवा लाख जपकर दशांश हवन करने का विधान है।
शिवतराय यह शिवजी का पंचाक्षरी मंत्र है। यह मंत्र भी नम: शिवाय की तरह साधक को पूर्ण सफलता प्रदान करता है। यह उसी के समान हर प्रकार के कार्यो में सिद्धि देता है। शरीर में चाहे कैसा भी रोग हो इसका जाप करने से समस्त रोगों का शमन हो जाता है।
मयस्कराय इस मंत्र को दुख और क्लेश नाश करने वाला सबसे सशक्त मंत्र बताया गया है। शिवजी की कृपा और भक्ति प्राप्त करने के लिए महाशिवरात्रि की रात्रि में रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र के 51 हजार जाप करें। ऊं नमो रुद्राय शिवजी के रुद्र रूप को समर्पित यह मंत्र समस्त प्रकार की पीड़ाओं, पापों, रोगों और शोकों का नाश करने वाला है। इस मंत्र को रुद्राक्ष की माला से 11 माला शिवरात्रि की मध्यरात्रि में जपते हुए दुग्धाभिषेक करें तो प्रत्येक रोग दूर होता है। सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। ऊं नम: शिवतराय भगवान शिव के सौम्य स्वरूप को समर्पित यह मंत्र हर प्रकार के विघ्नों को नष्ट करता है। लौकिक और अलौकिक सिद्धियां प्रदान करने वाला है। यह मंत्र महाशिवरात्रि के दिन एक लाख जपें और फिर प्रत्येक सोमवार को पांच माला जपें इससे जीवन में किसी प्रकार का अभाव नहीं रहता। मनुष्य अंत समय तक निरोगी बना रहता है।

