अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कृषि विश्वविद्यालय में सेमिनार आयोजित

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कृषि में महिलाओं के लिए कैरियर की संभावनाएं विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार का शुभारंभ करते हुए मुख्य अतिथि कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कहा कि आज दुनिया में हर क्षेत्र में महिलाओं की सहभागिता पुरूषों से कम नहीं है, महिलाएं हर क्षेत्र में पुरूषों से बराबरी कर रहीं हैं। उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में भी महिलाओं की अहम भूमिका है। आज महिलाएं फसलों की बुआई-रोपाई से लेकर तुड़ाई-कटाई तक पुरूषों के कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहीं हैं बल्कि उनसे ज्यादा भागीदारी निभा रही है। डॉ. चंदेल ने कहा कि यदि महिलाएं कृषि के क्षेत्र में कैरियर बनाना चाहें तो उनके लिए इस क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं। उन्होंने कार्यक्रम उपस्थित सभी महिलाओं को महिला दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस सेमिनार का आयोजन इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कैरियर डेव्हलपमेन्ट से सेन्टर द्वारा राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा कार्यक्रम के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की प्रबंध मण्डल सदस्य श्रीमती वल्लरी चन्द्राकर उपस्थित थीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि महाविद्यालय, रायपुर के अधिष्ठाता डॉ. एम.पी. ठाकुर ने की।
सेमिनार को संबोधित करते हुए कुलपति डॉ. चंदेल ने कहा कि कुछ वर्षाें पूर्व तक कृषि महाविद्यालयों में छात्राओं की संख्या लगभग नगण्य थी और यहां महिला अध्यापकों की संख्या भी बहुत ही कम थी लेकिन पिछले कुछ वर्षाें में कृषि महाविद्यालयों में छात्राओं-अध्यापिकाओं की संख्या में आशातीत वृद्धि हुई है और आज उनकी संख्या पूरूषों से भी ज्यादा हो गई है। उन्होेंने कहा कि आज कृषि शिक्षा, कृषि अनुसंधान और कृषि विस्तार तीनों ही क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाएं अपनी सहभागिता निभा रहीं हैं। उन्होंने बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सफल उद्यमियों – बायोकॉन की संस्थापक किरण मजुमदार शॉ और मंजरी शर्मा का उदाहरण देते हुए कहा कि इन महिला उद्यमियों ने देश दुनिया में अपनी सफलता का परचम लहराया है। सेमिनार की विशिष्ट अतिथि श्रीमती वल्लरी चन्द्राकर ने कहा कि महिलाएं कृषि के क्षेत्र में भी पुरूषों की तरह ही सफलता प्राप्त कर सकती हैं। उन्होंने स्वयं का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने इंजिनियरिंग में स्नातक एवं स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त करने के बावजूद कृषि के क्षेत्र में अपना मुकाम बनाया और आज एक सफल महिला कृषक एवं उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए बायोफर्टिलाईजर, टिश्यू कल्चर, नर्सरी प्रबंधन, खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में कार्य करने हेतु अधिक संभावनाएं हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. एम.पी. ठाकुर ने कहा कि लैंगिक समानता के क्षेत्र में भारत दुनिया के अग्रणी देशों में से एक है। आज देश में प्रति एक हजार पुरूषों पर 1 हजार 20 महिलाएं है और छत्तीसगढ़ में यह अनुपात और भी बेहतर है। यहां प्रति एक हजार पुरूषों पर 1 हजार 37 महिलाएं हैं। सेमिनार में अतिथि वक्ता के रूप में डॉ. आरती गुहे एवं डॉ. जयालक्ष्मी गांगुली ने कृषि के क्षेत्र में महिलाओं हेतु कैरियर की संभावनाओं पर सारगर्भित जानकारी दी। कैरियर डेव्हलपमेन्ट सेन्टर के अध्यक्ष डॉ. जी.के. श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण दिया। कैरियर डेव्हलपमेन्ट सेन्टर के संयोजक डॉ. एस.एस. टुटेजा ने आभार प्रदर्शन दिया। इस अवसर पर कार्यक्रम की आयोजन सचिव डॉ. सुबुही निषाद, विश्वविद्यालय के एन.एस.एस. प्रभारी डॉ. पी.के. सांगोड़े, महाविद्यालय एन.एस.एस. प्रभारी डॉ. पी.एल. जॉनसन सहित कृषि विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, वैज्ञानिक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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