मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ संयुक्त राज्य पेंशनर्स महासंघ के तत्वावधान में आज 14 मार्च 22 सोमवार को मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में विधानसभा सत्र के दौरान पूर्व निर्धारित आंदोलन कार्यक्रम के तहत रानी कमलापति(हबीबगंज) रेलवेस्टेशन से लेकर विधानसभा मार्ग पर जंगी निकाल कर दोनों राज्य सरकारों के विरुद्ध अपनी मांगों की पूर्ति को लेकर नारेबाजी किया और धरना- प्रदर्शन कर दोनों राज्यों से मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 के धारा 49(6) को विलोपित कर आपसी सहमति की संवैधानिक बाध्यता को समाप्त करने और केन्द्र के समान 31 प्रतिशत महँगाई राहत के आदेश तत्काल जारी करने की मांग की गई। धरना आंदोलन को संबोधित करते हुए पेंशनर फेडरेशन के सभी पदाधिकारियों ने मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कर्मचारियों को 31 प्रतिशत महँगाई भत्ता देने घोषणा किया परन्तु पेंशनरों के मामले पर चुप्पी साधे रखने पर पेंशनरों ने आक्रोश जताया। छत्तीसगढ़ राज्य में भूपेश बघेल सरकार द्वारा महँगाई भत्ते के मामले पर कर्मचारियों और पेंशनरों बीच भेदभावपूर्ण ब्यवहार किया जा रहा है और उनको अलग अलग तिथियों में महंगाई भत्ता स्वीकृत कर को अपमानित-अमानवीय कृत्य किया हैं। मप्र – छग संयुक्त पेन्शनर फेडरेशन के चेयरमेन बी के बख्शी की अगुवाई में भोपाल में आयोजित इस धरना-प्रदर्शन-आंदोलन को छत्तीसगढ़ राज्य संयुक्त पेन्शनर फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव एवं फेडरेशन से जुड़े क्रमश: छत्तीसगढ़ पेंशनधारी कल्याण संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ डी पी मनहर, छत्तीसगढ़ प्रगतिशील पेंशनर कल्याण संघ के प्रांताध्यक्ष आर पी शर्मा, पेंशनर्स एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष गंगा प्रसाद साहू तथा भारतीय राज्य पेंशनर्स छत्तीसगढ़ प्रदेश के अध्यक्ष जे पी मिश्रा के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ राज्य के पेंशनरों ने इस सफल आंदोलन का समर्थन किया। पेंशनर फेडरेशन की धरना में मध्यप्रदेश- छत्तीसगढ़ राज्य संयुक्त पेन्शनर फेडरेशन के चेयरमैन बी के बख्शी ने अपने सम्बोधन में कहा कि दोनों ही राज्य सरकारों द्वारा पेंशनरो की उपेक्षा और आर्थिक मामलों को आपसी सहमति के नाम पर लटकाए रखने की नीति और नियत से दोनों ही राज्यों के पेंशनरों में भारी रोष है। इस आन्दोलन में मुख्य रूप से धारा 49 को हटाने की मांग एवं अन्य मांगो में केन्द्र के समान 31त्न प्रतिशत महंगाई राहत,छठवें वेतनमान का 32 माह तथा सातवें वेतनमान का 27 महीने का एरियर,आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा का लाभ देने तथा अन्य पेन्शनर हितैषी मांगो को लेकर आगे दोनों राज्यों के राजधानी भोपाल और रायपुर में पेंशनर संगठनों की सहमति से एक ही तिथि पर अलग अलग एकजुट आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी। इस अवसर पर भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री व मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ राज्य संयुक्त पेन्शनर फेडरेशन के को चेयरमेन तथा छत्तीसगढ़ फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने बताया है कि छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश शासन की उपेक्षा से दोनों राज्य के पेंशनर एक समान पीडि़त हैं। दोनों ही सरकारें पेंशनरों की समस्याओं को दूर करने में नाकाम है और आपसी मिलीभगत कर पेंशनर्स के केन्द्र के समान महंगाई राहत सहित सभी आर्थिक मामलों को मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49(6) में उल्लेख प्रावधान को लेकर आपसी सहमति के बहाने जानबूझकर लटकाए हुए हैं। केन्द्र सरकार द्वारा घोषित 31 प्रतिशत महंगाई राहत के स्थान पर पेंशनरों को दोनों ही राज्य में केवल 17 प्रतिशत महंगाई राहत देना अत्यंत पीड़ा दायक है। दोनों ही राज्यो में सेवारत कर्मचारियों से भी कम प्रतिशत में महंगाई भत्ता देना वरिष्ठ नागरिक पेंशनरों का घोर अपमान है जो अब बर्दास्त नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद छठवें वेतनमान के 32 माह राशि का भुगतान नहीं कर रहे हैं और सातवें वेतनमान के 27 माह के एरियर देने के मामले में भी चुप्पी साधे हुये है। जारी विज्ञप्ति में आगे बताया गया है कि छत्तीसगढ़ में 3 जनवरी 22 को मंत्रालय के समक्ष प्रदर्शन-घेराव का आन्दोलनात्मत कार्यक्रम की पूरी तैयारी के बाद उसे कोरोना संक्रमण के कारण स्थगित करना पड़ा जिसे अब होली के बाद पेन्शनर फेडरेशन के संयुक्त बैठक में नई तिथियां तय कर जंगी प्रदर्शन किया जाएगा।
मप्र-छग राज्य सँयुक्त पेंशनर्स फेडरेशन की जंगी रैली, दोनों राज्य के पेन्शनर राज्य सरकारों के उपेक्षित रवैये नाराज
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