सास और बहू के रिश्ते को बहुत नाजुक माना जाता है. आपने आस-पास में सास और बहू के नोकझोंक बहुत देखें होंगे. अब इस रिश्ते के ऊपर एक रिसर्च की गई है जिसमें कई चौकाने वाले खुलासे हुए हैं. इस रिसर्च को बॉस्टन यूनिवर्सिटी में इकनॉमिक्स की प्रोफेसर और वर्ल्ड की रिसर्चर एस अनुकृति ने किया है. उनकी रिसर्च से कई नई बातें सामने आई है. उन्होंने अपने रिसर्च के लिए भारतीय गांव को चुना और उन महिलाओं को शामिल किया जो अपने घर में सास या बहू के साथ रहती हैं.
रिसर्च में यह बात आई सामने
दैनिक भास्कर में छपी रिपोर्ट के अनुसार एस. अनुकृति ने बताया है कि जो बहुएं गांव में अपने सास के साथ रहती हैं. उन्हें बेहद कम आजादी मिलती है. साथ ही उनका सोशल दायरा भी बेहद कम है. रिसर्च में पाया गया कि सास के साथ रहने वाली बहुओं की सामाजिक समझ, फैमिली प्लानिंग, नारी स्वास्थ्य, व्यक्तिगत आजादी की समझ बहुत कम है.
बेटे के जन्म पर ज्यादा जोर
रिसर्च में यह भी सामने आया है कि भारत के ग्रामीण इलाकों में आज भी पितृसत्ता की सोच हावी है. इस रिसर्च में यह सामने आया है कि 82 प्रतिशत सास यह चाहती हैं कि उनकी बहू को बेटा हो. साथ ही 86 प्रतिशत महिलाओं ने यह माना है कि वह अपने पति और सास के अलावा किसी और से बात नहीं करती है. 22 प्रतिशत महिलाओं ने माना कि उनके मायके वालों जैसे मां और हदन से बात नहीं होती है. सास से अलग रहने वाली महिलाएं अपने माता पिता और परिवार के संपर्क में ज्यादा रहती हैं.
शहरी महिलाएं ज्यादा संपन्न
रिसर्च में सामने आया कि जो महिलाएं पढ़ी लिखी हैं और शहरी क्षेत्र में अपने सास के साथ रहती है वह सामाजिक रूप से ज्यादा विकसित होती हैं. वह नौकरी करती हैं और सास बच्चों की देखभाल करने में ऐसी महिलाओं को ज्यादा मदद करती हैं. करीब 75 प्रतिशत पुरुष अपने पैसे पत्नी के हाथों में देते हैं.

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