तुम्ही राष्ट्रवादी भी हो ,तुम्हीं राष्ट्र भी हो। तुम्हीं संसद भी हो, तुम्हीं संविधान भी हो। तुम्हीं सनातन संस्कृति भी हो, तुम्ही स्वाभिमान भी हो। तुम्ही तिरंगा भी हो ,तुम्हीं भगवा ध्वज भी हो। तुम्हीं आम नागरिक भी हो,तुम्हीं प्रधानमंत्री भी हो। तुम्हीं किसान ,तुम्हीं देश के सिपाही भी हो। तुम्हीं बुद्धिजीवी, तुम्हीं ज्ञान और विज्ञान भी हो। सब कुछ तुम्हीं हो। अपने साथ अन्याय न होने देना ,और तुम गलती से भी गलती मत करना। तभी तुम्हारा सब कुछ ठीक रहेगा।
शिक्षा:–अपनी शक्ति को पहचानो और उसका सदुपयोग करो। राष्ट्र की शक्ति को सदा बनाये रखो। राष्ट्रीय प्रतीकों को सदा सिंचित करना तुम्हारा परम् और प्रथम कर्तव्य है। तभी तुम और तुम्हारा देश समृद्ध होगा।
जय माँ
संकर्षण शरण (गुरु जी),प्रयागराज।

