तुलसी और उसके तेल की मेडिसिनल वैल्यूज़ को लेकर मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में अनोखी रिसर्च हुई. इस रिसर्च में कई ऐसी बातें सामने आईं, जिसके बारे में जानकर कोई भी हैरान रह जाए. रिसर्च में सामने आया कि ख़ासतौर से वेस्ट यूपी के किसान तुलसी की भी खेती करें तो उनके घर में मां लक्ष्मी धनवर्षा कर सकती हैं. इस शोध के मुताबिक, गन्ना बेल्ट के रूप में पहचान रखने वाले वेस्ट यूपी में अब तुलसी की खेती से किसानों को लक्ष्मीजी का वरदान मिल सकता है. सीसीएसयू के बॉटनी डिपार्टमेंट में हुए शोध में दावा किया गया है कि अगर किसान गन्ने के साथ-साथ तुलसी की भी खेती करें तो उन पर धन वर्षा होगी. इस छात्र ने तुलसी की पांच प्रजातियों पर शोध किया है. छात्र का कहना है कि इन पांचों स्पेशीज़ की मेडिसिनल वैल्यूज़ अलग-अलग हैं. इनकी सुगंध अलग-अलग है. छात्र ने अपने शोध को इंटरनेशनल जनरल में भी प्रकाशित होने के लिए भेजा है. रिसर्च स्कॉलर का कहना है कि समूचे विश्व में तुलसी की ६७ प्रजातियां पाई जाती हैं. इन सभी प्रजातियों की क्वालिटी अलग-अलग है. तुलसी की इन प्रजातियों के तेल की औषधीय कंपनियों के साथ ही सौंदर्य प्रसाधन बनाने वाली कंपनियों में बड़ी मांग है. बॉटनी विभाग के एचओडी प्रोफेसर विजयच मलिक के निर्देशन में पीएचडी कर रहे छात्र अर्चस्वी त्यागा बताते हैं कि उन्होंने पांच प्रजाति की तुलसी उगाई. इसमें पहली प्रजाति तुलसी यानि ओसिमम टेनु फ्लोरम है. इसकी पत्तियों से रस निकलने के बाद रमन स्प्रेक्टोस्कोपी और एफटीआईआर स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक से तेल का रासायनिक संगठन पता लगाया गया है. वह बताते हैं कि १०० ग्राम सूखी पत्ती से दो एमएल तेल की प्राप्ति हुई. पीले रंग की तेल की ख़ुशबू लौंग की तरह है. दूसरी प्रजाति राम तुलसी या वन तुलसी की है, जिसकी ख़ुशबू भी लौंग की तरह है. तीसरी प्रजाति ओसिमम बेसीलीकम है, जिसमें मीठी ख़ुशबू आती है. चौथी प्रजाति अमेरिकन तुलसी का रासायानिक संगठन कैंफर रिच है, जिसकी ख़ुशबू कपूर की तरह है और पांचवीं प्रजाति अफ्रीकन तुलसी की है. अर्चस्वी बताते हैं कि पांचों प्रजाति के तेल का जो रासायनिक संगठन है, उसका इस्तेमाल दांतों की विभिन्न बीमारियों के इलाज में किया जा रहा है. इसके अलावा परफ्यूम, एरोमा थेरेपी, फूड प्रीज़र्वेटिव और एंटी माइक्रोबियल में बड़ा इस्तेमाल हो रहा है. बॉटनी विभाग के एचओडी बताते हैं कि शोध से पता चलता है कि यहां पर पांचों प्रजाति की तुलसी के लिए वातावरण अनुकूल है. किसान अगर गन्ने के साथ इन प्रजातियों की तुलसी की खेती करें तो वो बड़ा मुनाफा कमा सकते हैं. इंडियन इंस्टी्टयूट ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च सेंटर दिल्ली से इसके बीज लिए जा सकते हैं. पत्तियों में तेल की मात्रा ठीक है. इसके तेल की कितनी डिमांड है इसका अंदाज़ा इस बात से भी लगाइए कि कई कंपनियां तो ख़ुद ही खेत पर आकर पत्तियां ले जाती हैं, यानि कह सकते हैं तुलसी सिर्फ आपके आंगन को ही नहीं आपकी जिदंगी भी महका सकती है.

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