- हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु की पूजा-अर्चना करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। अपरा एकादशी का व्रत करने से प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है। कहा जाता है कि इस दिन व्रत कथा सुनने मात्र से अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि जो भी मनुष्य इस दिन श्रद्धाभाव से व्रत-पूजन करता है, उसे स्वर्ग में स्थान प्राप्त होता है।
अपरा एकादशी पूजन विधि
– अपरा एकादशी के दिन सुबह प्रात: जल्दी उठ कर स्नान करें और पीले वस्त्र पहनें।
– इसके बाद मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करके उन्हें स्नान करवाएं और साफ धुले हुए वस्त्र पहनाएं।
– भगवान विष्णु के समक्ष धूप-दीप प्रज्वलित करें और उनकी विधि- विधान से पूजा करें।
भगवान को फल, फूल, मिष्ठान आदि अर्पित करें और उनकी आरती करें।
– अपरा एकादशी के दिन विष्णु चालीसा, विष्णु सहस्रनाम और व्रत कथा अवश्य पढ़ें।
– भगवान विष्णु को भोग लगाएं और प्रसाद घर में सभी को बांटे और खुद भी ग्रहण करें।
अगले दिन द्वादशी तिथि के दिन पारण करें।

