तुम्हें तोड़ने के लिये,बर्बाद करने के लिये,बदनाम करने के लिये या मारने के लिये किसी गोली-बंदूक अथवा किसी भी मंत्र-तंत्र या धक्के की आवश्यकता नहीं है,क्योंकि तुम्हारे अंदर हीं तुम्हे खत्म करने वाली आसुरी शक्ति विराजमान है,यथा:-ईर्ष्या,जलन,वासना,स्वार्थ,आलस्य,क्रोध,अहंकार और तुम्हारी अपनी नाकारात्मक बुद्धि के रूप में । ये सब शत्रु ही तो हैं तुम्हारे और तुम दिन-रात इन्हीं में से किसी न किसी से संगती करके टूटते चले जाते हो । और तुम्हे खुशी देने ,आबाद करने तथा सुख-शांति,प्रतिष्ठा,स्वास्थ्य देने के लिये भी किसी मंत्र-तंत्र,पूजा-पाठ इत्यादि की आवश्यकता नहीं है,क्योंकि तुम्हारे अंदर वो महाशक्ति विराजमान है,यथा:-प्रेम,करुणा,सत्य,समर्पण, गुरु का सानिध्य,तुम्हारा विवेक,धर्म,संस्कार और परमात्मा पर भरोसा तथा कर्तव्य और कर्म । इनकी संगति बहुत कम करते हो जबकि यही तुम्हे अब तक संभाले हुये हैं । अब तुम्हे चुनना है कि तुम चाहते क्या हो ।

ज्ञान:-आज और अभी से जान लो अपने आबादी और बर्बादी का लक्षण और फिर समर्पित हो जाओ अपनी अच्छाईयों के प्रति ।

आज इतना हीं

जय माँ

संकर्षण शरण (गुरु जी)

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