सफलता की कुंजी कहती है कि संतान के मामले में माता पिता को अधिक सजग रहना चाहिए. यदि इसमें चूक जाते हैं तो बुरे परिणाम भी भोगने पड़ते हैं. माना जाता है कि माता पिता को अपने बच्चों की परवरिश ठीक उसी प्रकार से करनी चाहिए जैसे एक माली अपने बाग की देखभाल और गर्मी-सर्दी और हर मौसम से रक्षा करता है.
लापरवाही न बरतें
सफलता की कुंजी कहती है कि माता पिता को बच्चों के मामले में कभी लापरवाही नहीं होना चाहिए. एक बाद गलत आदत पडऩे पर उसका त्याग करना मुश्किल होता है. इसलिए हर माता पिता को ये कोशिश करनी चाहिए कि उनके बच्चे में कोई भी गलत आदत प्रवेश न कर पाए. इसलिए इन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
अनुशासन का पाठ अवश्य पढ़ाएं
सफलता की कुंजी कहती है कि बच्चों को शुरू से ही अनुशासन के महत्व के बारे में बताना चाहिए. जो माता पिता अपने बच्चों में अनुशासन के महत्व को समझाने में सफल रहते हैं, वे दुखों से दूर रहते हैं. ऐसे माता पिता की संतान जीवन में विशेष सफलता प्राप्त करती है और कुल का नाम भी रोशन करती हैं.
संतान को समय अवश्य दें
सफलता की कुंजी कहती है कि अभिभावक कितने ही व्यस्त क्यों न हों उन्हें अपनी संतान के लिए नित्य उचित समय अवश्य बिताना चाहिए. ऐसा करने माता-पिता और बच्चों के बीच संवादहीनता की स्थिति नहीं बन पाती है. संवादहीनता से मजबूत से मजबूत रिश्ते भी कमजोर पडऩे लगते हैं.
सच बोलने के लिए प्रोत्साहित करें
सफलता की कुंजी कहती है कि अभिभाक अपने बच्चों को सच बोलने के लिए प्रेरित करना चाहिए. लेकिन ये तभी संभव है जब स्वयं माता पिता को भी अपने आचरण का ध्यान रखेगें. इस बात को नहीं भूलना चाहिए कि माता पिता से ही बच्चे अधिक सीखते और समझते हैं. गीता में सत्य को एक श्रेष्ठ गुण बताया गया है. सत्य बोलने वाले व्यक्ति को आदर और सम्मान प्राप्त होता है.

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