उद्योग नगरी रायगढ़ में प्रदूषण में ऐसे ही जानलेवा बना है फिर ड्रग्स के आगमन ने तो और बेड़ागर्क किया हुआ है। पानठेले अब गिनती के हैं इनकी आड़ में पान मसाला और सिगरेट की दुकानों की भरमार है और इन सभी जगहों पर गांजा को रोल करने वाला पेपर, चीलम, हुक्का तम्बाकू और चरस के साथ मिलाने वाला सिगरेट मिल जाएगा। बाकी तोश, मलाना, चंबा, स्फीति के साथ नेपाल की क्रीम भी बाजार में मौजूद है। इतना खुलापन नशे के लेकर कभी नहीं था, यह कैसा विकास है रायगढ़ का! चरस-गांजे के धुएं में तो रायगढ़ के बच्चों को नशे में उड़ा तो दिया साथ ही कई घरों के चिराग को भी बुझा दिया।

रायगढ़ मेडिकल कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग के मानसिक रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. राजेश कुमार अजगल्ले के अनुसार “गांजा सस्ता नशा है और आसानी से उपलब्ध है। वर्तमान में नाबालिग इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं और कई मामलों में उनकी जान तक चली गई है। परेशानी वाली बात यह है कि शौक में हुक्का से शुरू हुआ सफर कब ड्रग्स में तब्दील होकर जानलेवा बन जाता है बच्चे को तो पता ही नहीं चल पाता। गांजा के सेवन करने वाले के पास जाने पर आपको पता चल जाएगा पर जो सोलुशन का नशा करते हैं उसका पता आपको शायद चले। बच्चा 5 घंटे के लिए मानों दूसरी दुनिया मे चला जाता है।” यह बातें किसी भी पालक को विचलित कर सकती हैं।

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