नई दिल्ली। रेलवे के लेवल क्रॉसिंग पर तैनात एक गेटमैन के खिलाफ इसलिए अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है, क्योंकि वह अपनी ड्यूटी पर निजी कार से पहुंचा था। जब इंस्पेक्शन करने पहुंचे रेलवे के एक बड़े अधिकारी को पता चला कि गेटमैन होकर भी वह कार से ड्यूटी पर आया है तो उसे चार्जशीट कर दिया गया। उसपर आरोप है कि उसने ड्यूटी पर लापरवाही की है। सवाल उठ रहे हैं कि भारतीय रेलवे किस दुनिया में जी रहा है, जहां एक मामूली कर्मचारी के अपनी निजी कार के इस्तेमाल करने पर भी रोक है। रेलवे का एक गेटमैन अपनी ड्यूटी पर कार से पहुंचा तो उसे प्रोटोकॉल तोडऩे के आरोपों में चार्जशीट कर दिया गया। सवाल है कि क्या रेलवे के ग्रेड-4 के कर्मचारियों के लिए ड्यूटी पर कार से जाना गुनाह है? अंग्रेजी अखबार पायनियर में छपी खबर के मुताबिक रेलवे ने उस गेटमैन का कार से ड्यूटी पर पहुंचना ना सिर्फ प्रोटोकॉल तोडऩा बताया है, बल्कि यह भी कहा गया है कि यह कृत्य ड्यूटी के प्रति लापरवाही जाहिर करता है। इसका मतलब ये हुआ कि चाहे रेलवे फाटक वीरान जगह में ही क्यों ना हो और वहां अंधेरी रात में ही क्यों ना जाना पड़े, गेटमैन अपनी फैमिली कार से भी नहीं जा सकता? घटना यूपी के हापुड़ रेलवे स्टेशन के पास की है। यह स्टेशन राजधानी दिल्ली से भी महज चंद किलोमीटर की दूरी पर है। यहां रेलवे के एक गेटमैन ने रात के समय अपनी ड्यूटी पर पहुंचने के लिए अपनी प्राइवेट कार का इस्तेमाल किया था। वह रेलवे फाटक पर पहुंचा और वहीं कार पार्क करके अपनी ड्यूटी में जुट गया। संयोग से उसी रात रेलवे के एक बड़े अधिकारी इंस्पेक्शन पर थे, जिन्होंने फाटक के पास गेटमैन की कार देखकर इसे पूरी तरह से रेलवे प्रोटोकॉल का उल्लंघन पाया। संबंधित गेटमैन को रेलवे की ओर से जो चार्जशीट थमाई गई है, उसमें लिखा है-‘आरोप: आप 23-24 जुलाई, 20222 की गेटमैन की ड्यूटी पर तैनात थे। गाड़ी संख्या 12430 से प्रिंसिपल इंजीनियर निरीक्षण कर रहे थे। आपने अपने लेवल क्रॉसिंग पर कार पार्क कर रखी थी। आपने माना कि कार आपकी ही है। आपका कार से ड्यूटी पर आना रेल प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। यह ड्यूटी के प्रति आपकी लापरवाही दिखाता है। आपने रेल प्रशासन अधिनियम वर्ष, 1968 के प्रावधान का उल्लंघन किया है।’ इस चार्जशीट पर सीनियर सेक्शन इंजीनियर, हापुड़ का दस्तखत है। जानकारी के मुताबिक जब उत्तर रेलवे के अधिकारियों की नजर रेलवे फाटक से कुछ मीटर की दूरी पर खड़ी एक मारुति कार पर पड़ी, तो उन्होंने पता लगाना शुरू किया कि कार किसकी है। औचक निरीजक्षण के दौरान गेटमैन ने अधिकारियों को खुद बताया कि कार उसी की है। लेकिन, उसका यह सच बोलना उसपर भारी पड़ गया और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई। हालांकि, इस मामले में संबंधित गेटमैन या रेलवे अधिकारियों का जवाब नहीं मिल पाया है। ट्विटर पर एक शख्स ने लिखा है, ‘कैसे एक कार रखनाना ‘ड्यूटी से लापरवाही’ और ‘उल्लंघन’ का मामला है?’ मैं अश्विनी वैश्नव (रेल मंत्री) जी से अनुरोध करता हूं कि सुनिश्चित करें कि किसी तरह का अन्यान नहीं हो।’ रेलवे के इस नियम पर सवाल इसलिए भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि आज बेरोजगारी के दौर में बेहतर डिग्री वाले भी गेटमैन, पैटमैन जैसी ड्यूटी करने के लिए तैयार हैं, लेकिन वह भी मिलना मुश्किल है। ऐसे में रेलवे के मामूली कर्मचारियों के लिए ऐसी मानसिकता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। रेलवे का गेटमैन भले ही देखने में छोटा कर्मचारी हो, लेकिन उसकी एक चूक से बहुत बड़ी दुर्घटना हो सकती है। इसलिए, उसके काम में जिम्मेदारी बहुत ही ज्यादा है। ऐसे में अगर कोई कर्मचारी अपने निजी वाहन से पहुंच ही गया तो, उसे अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखना आज के समय में तो हास्यास्पद ही कहा जा सकता है।

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