बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष तेजकुंवर नेताम ने बताया, कहा क्राउलिंग से ही मोबाइल की लत लगने लगती है, पेरेंट्स को भी काउंसिलिंग में कहेंगे खुद भी बचें
दुर्ग.

ऑनलाइन क्लासेज की वजह से अधिकांश बच्चों में मोबाइल की लत लग गई है। इससे उनकी फिजिकल एक्टिविटी कम हो रही है और मोबाइल से होने वाले दुष्प्रभाव का सामना उन्हें करना पड़ रहा है। ऐसे में बाल संरक्षण आयोग की पहल है कि मोबाइल की लत से बच्चों को बचाने एक विशेष कार्यक्रम स्कूलों में चलाया जाए। इसे मनोवैज्ञानिकों की मदद से तैयार किया गया है। इसमें फिजिकल एक्टिविटी पर ज्यादा जोर होगा। यह बात बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती तेजकुंवर नेताम ने कही। उन्होंने कहा कि आजकल तो बच्चे क्राउलिंग करते हैं उसी समय से धीरे-धीरे मोबाइल के अभ्यस्त हो जाते हैं। ऐसे में हमने मनोवैज्ञानिकों की राय लेकर ब्रोशर तैयार किया है और कार्यक्रम बनाया है। क्लस्टर लेवल पर मास्टर ट्रेनर इस संबंध में शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे और स्कूलों में बच्चों को एक्टिविटी कराई जाएगी। इस दौरान कलेक्टर श्री पुष्पेंद्र मीणा भी मौजूद रहे। कलेक्टर ने कहा कि बच्चों के बेहतर भविष्य की दिशा में हर संभव कार्य जिले में किया जाएगा। अभी निर्देशित किया गया है कि दस दिनों के भीतर सभी आंगनबाड़ियों और स्कूलों की मरम्मत कर दी जाए। जिन आंगनबाड़ियों में पेरेंट्स बच्चों को अंडा खिलाने के इच्छुक हैं वहां पर अंडा और जहां इस संबंध में अनिच्छुक हैं वहां पर केला और दूध बच्चों को दिया जा रहा है। सैनिटाइजेेशन को लेकर भी विशेष रूप से निर्देश दिये गये हैं। स्कूलों के टायलेट्स काफी खराब रहते हैं। इनकी मरम्मत और नियमित साफ-सफाई को लेकर निर्देश दिये गये हैं और इसे लगातार ट्रैक किया जा रहा है। इस दौरान आयोग के सदस्य श्री सोनल गुप्ता, सचिव श्री प्रतीक खरे, जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री विपिन जैन , सहायक संचालक श्री बृजेन्द्र ठाकुर सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। आयोग के सचिव श्री खरे ने विस्तार से एजेंडा पर चर्चा की। इसमें आरटीई से लेकर कोविड वैक्सीनेशन तक विस्तार से सभी मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में महिला एवं बाल विकास के अलावा पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण, श्रम, आबकारी विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।
पाक्सो के मामलों की विशेष समीक्षा- बैठक में पाक्सो के मामलों की विशेष समीक्षा की गई। अध्यक्ष ने कहा कि हर थाने में बाल कल्याण अधिकारी हो और वो ये सुनिश्चित करें कि बच्चों और पेरेंट्स की बेहतर काउंसिलिंग हो। उन्होंने कहा कि बच्चों को मानसिक संबल दिया जाना जरूरी है ताकि वो मजबूत रह सके। इसके लिए थानों में नियमित रूप से बच्चों के मनोविज्ञान के मुताबिक उनसे व्यवहार करने को लेकर प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। सचिव श्री खरे ने कहा कि थानों में इस संबंध में अधिकतर स्टाफ को प्रशिक्षित किया जाना जरूरी है ताकि हमेशा ही विवेचना के साथ बेहतर काउंसिलिंग की संभावना बनी रहे।
सेरेब्रल पाल्सी को लेकर बेस्ट प्रैक्टिस की प्रशंसा- बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री विपिन जैन ने बताया कि जिले में डीएमएफ के माध्यम से सेरेब्रल पाल्सी की समस्या वाले बच्चों के पोषण के लिए विशेष कार्यक्रम चलाया जा रहा है तथा इसके लिए फिजियोथैरेपिस्ट की भी मदद ली जा रही है। ऐसे 53 बच्चों का चिन्हांकन किया गया है। आयोग ने इस नवाचार की प्रशंसा की और अन्य जिलों में भी इसे लागू करने की जरूरत बताई।

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