भारत की आज़ादी के 75 साल पूरे होने पर मोदी सरकार की ओर से देश भर में मनाए जा रहे अमृत महोत्सव के तहत रविवार को इसरो आज़ादीसैट नाम की एक सैटेलाइट लॉन्च कर रहा है. इस सैटेलाइट की ख़ास बात ये है कि इसे बनाने में देश भर के सरकारी स्कूलों की 750 छात्राओं ने सहयोग किया है. इस सैटेलाइट को ‘स्पेस किड्ज़ इंडिया’ नाम की एक कंपनी ने बनाया है और इसे इसरो के स्मॉल सेटेलाइट लॉन्च व्हिकल (एसएसएलवी) से लॉन्च किया जाएगा.

ये एसएसएलवी की पहली उड़ान भी होगी. ये सैटेलाइट सतीश धवन स्पेस सेंटर श्रीहरिकोटा से लॉन्च होगी और इस दौरान प्रोजेक्ट का हिस्सा रहीं चार सौ से अधिक छात्राएं भी वहां मौजूद रहेंगी. 8 किलो की इस सैटेलाइट में 75 फेमो एक्सपेरिमेंट हैं और इसमें सेल्फ़ी कैमरा भी लगा है जो इसके अपने सोलर पैनल की तस्वीरें लेगा. इसमें लंबी दूरी के संचार उपकरण भी लगे हैं.
सपनों की उड़ान

सैटेलाइट इंडिया की सीईओ श्रीमथि केसन ने कहा, “आज़ादी सैट 750 लड़कियों की भावना है. ये उनके आगे बढ़ने का ख़्वाब है. देश के अलग-अलग हिस्सों के सरकारी स्कूलों से जुड़ी छात्राओं को इस प्रोजेक्ट से जोड़ा गया. इसका मक़सद लड़कियों में विज्ञान से जुड़ी जागरूकता फैलाना है.” श्रीमथि केसन कहती हैं, “सीधे तौर पर इस प्रोजेक्ट से 750 लड़कियां जुड़ी हैं लेकिन इस प्रोजेक्ट के ज़रिए हमने लाखों बच्चों तक विज्ञान को पहुँचाया है. छोटे-छोटे ज़िलों और क़स्बों के स्कूलों को जोड़ा गया.”

सैटेलाइट का पेलोड डिवेलप करने का प्रोजेक्ट क़रीब छह महीनों तक चला और इस दौरान प्रोजेक्ट से जुड़ी छात्राओं को ऑनलाइन क्लास दी गईं. केसन कहती हैं, “आज़ादी सैट उड़ान भर रही है. लेकिन इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी और ख़ास बात ये है कि हम विज्ञान को उन स्कूलों और बच्चों तक लेकर गए जो कहीं ना कहीं बहुत पिछड़े हैं. इस प्रोजेक्ट का असली मक़सद लड़कियों में वैज्ञानिक सोच का विकास करना है.”

इस प्रोजेक्ट से जुड़ी 750 में से कुल 462 लड़कियों को सैटेलाइट लॉन्च देखने के लिए श्रीहरिकोटा ले जाया जा रहा है.

केसन कहती हैं, “इसरो पहुँचना और अपने सैटेलाइट को लॉन्च होते हुए देखना छात्राओं के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है. हम चाहते थे कि सभी छात्राओं को लाया जाए लेकिन लॉजिस्टिकल कारणों की वजह से वो संभव नहीं हो पाया.”
केवल लड़कियाँ ही क्यों?

इस प्रोजेक्ट में लड़कियों को शामिल करने की वजह बताते हुए श्रीमथि केसन कहती हैं, “मैं एनसीसी से जुड़ी थी, बेस्ट कैडेट रही और सेना में सीधे भर्ती हुई. लेकिन मेरी सिर्फ़ 18 साल की उम्र में शादी हो गई थी. एक लड़की के सामने जो चुनौतियां होती हैं, मैं उनसे गुज़र चुकी हूँ. मेरा सपना था कि मैं लड़कियों में जागरूकता पैदा करूं और उन्हें बड़े सपने देखना सिखाऊं. अंतरिक्ष में अपने ख़्वाब को पहुँचाने से बड़ा और क्या ही होगा. इसलिए ही हमने इस प्रोजेक्ट में सिर्फ़ लड़कियों को चुना क्योंकि हम उन्हें बड़े सपने दिखाना चाहते थे.”

केसन कहती हैं, “जब हम छात्राओं की ऑनलाइन क्लास ले रहे थे तब हम उन्हें सिर्फ़ विज्ञान नहीं सिखा रहे थे बल्कि ये आत्मविश्वास भी भर रहे थे कि वो कुछ भी कर सकती हैं और कहीं भी पहुँच सकती हैं. जो छात्राएं हमारे साथ जुड़ी हैं वो अब वैज्ञानिक बनने का सपना देख रही हैं.”

“हमने बच्चियों के मन में विज्ञान और आत्मविश्वास का बीज डाल दिया है और हम ये विश्वास करते हैं कि एक पुल बन जाएगा जो उन्हें विकास और प्रगति से जोड़ेगा. लड़कियों के विकास के बिना देश के पूर्ण विकास की कल्पना नहीं की जा सकती है.”

भारत आज़ादी के 75 वर्ष मना रहा है लेकिन सामाजिक और आर्थिक तौर पर अभी देश की आधी आबादी के सामने बड़ी चुनौतियां हैं.

2011 की जनगणना के मुताबिक भारत में साक्षरता दर 74 प्रतिशत है लेकिन महिलाओं की साक्षरता दर सिर्फ़ 64 प्रतिशत है.

भारत सरकार की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ साल 2013 में उच्च शिक्षा के मामलों में प्रति सौ पुरुषों की तुलना में 81 महिलाओं ने ही उच्च शिक्षा के लिए दाख़िला लिया.

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