सोशल मीडिया पर कई फोटो वायरल हो रहे हैं, जिनमें दिख रहा है कि इनकम टैक्स की रेड में काफी पैसा जब्त किया गया है.

इस तरह की तस्वीरें अक्सर आती हैं, जिसमें दिखाया जाता है कि इनकम टैक्स की रेड में काफी पैसा, सोना वगैरह मिला है. इनकम टैक्स रेड में ऑफिसर्स दबिश देते हैं और फर्जी संपत्ति की जांच करते हैं. आपने फिल्मों में भी देखा होगा कि जब इनकम टैक्स के अधिकारी रेड मारते हैं तो क्या होता है?

लेकिन, आज हम आपको बताते हैं कि जब हकीकत में इनकम टैक्स अधिकारी कहीं चेकिंग करने जाते हैं, तो किस तरह से कार्रवाई करते हैं. साथ ही जानते हैं कि किस तरह पैसे जब्त किए जाते हैं और फिर जब्त किए हुए पैसे का क्या करते हैं?
इनकम टैक्स विभाग से रिटायर्ड राजस्थान के जयपुर निवासी एक अधिकारी ने अपने अनुभव के आधार पर बताया कि पहले तो यह तय किया जाता है कि कौन संदिग्ध है और किस के यहां रेड करने जाना है. इसके बाद वरिष्ठ अधिकारी के नेतृत्व में सर्च वारंट जारी किया जाता है. फिर सर्च टीम बनाई जाती है.

सर्च टीम में अलग अलग संख्या होती है. फिर टीम आती है और सर्च वारंट देती है. इसके बाद जहां सर्च ऑपरेशन जारी रहता है, वहां किसी को भी उस परिसर से बाहर जाने की अनुमति नहीं होती है. ना ही वे व्यक्ति फोन आदि का इस्तेमाल कर सकते हैं और किसी भी बाहरी व्यक्ति से बात नहीं कर पाते हैं. वैसे अधिकारी मौके पर स्थिति के हिसाब से अन्य निर्णय ले सकते हैं. अगर किसी व्यक्ति को वॉशरूम भी जाना होता है तो आयकर अधिकारी की परमिशन लेना आवश्यक होता है. कई बार सर्च ऑपरेशन लंबा चलता है तो खाने पीने के लिए भी रसोई का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. जिस व्यक्ति के यहां रेड मारी जाती है, वहां से सामान जब्त करने के भी कई नियम होते हैं. कम्प्यूटर आदि की जांच में सिस्टम की हार्ड डिस्क अपने साथ ले लेता हैं और केश, ज्वैलरी को जब्त कर लेते हैं. फिर जिन जिन सामान को जब्त किया जाता है, उनकी जानकारी अगली पार्टी को भी दी जाती है और फिर उन्हें सत्यापित करवाया जाता है. तलाशी अभियान के बाद बयान भी दर्ज किए जाते हैं. इसके अलावा अगर किसी व्यापारिक प्रतिष्ठान पर छापा पड़ता है तो बेचने के लिए रखे सामान को जब्त नहीं किया जाता है.

अगर जब्त संपत्ति की बात करें तो आयकर विभाग सबसे पहले उस पैसे को बैंक में जमा करवाते हैं. इनमें कमिश्नर से जुड़े खातों को भी इन्वॉल्व किया जाता है. इसके बाद पूरी संपत्ति आय आदि की जांच होती है और उसके बाद टैक्स की गणना की जाती है, जिसमें जुर्माना आदि भी शामिल किया जाता है. फिर टैक्स डिमांड की गणना होती है और फिर से ट्रॉयब्यूनल में सेट करती है और बचे हुए पेमेंट को वापस कर दिया जाता है.



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