शास्त्रों में मेहमान को भगवान का दर्जा प्रदान है, यही कारण है कि कहा जाता है घर में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की अच्छे से आदर सम्मान करना चाहिए। परंतु इस संदर्भ में शास्त्रों कुछ ऐसी भी बातें भी बताई गई है जिन्हें मेहमानों को कभी नहीं पूछना चाहिए। जी हां, विष्णु पुराण में तीन ऐसे बातें जो किसी से भी पूछनी भारी पड़ जती है। तो चलिए बिना देर किए जानते हैं कौन सी हैं वो बातें जो घर आए मेहमनों से पूछनी भारी पड़ जाती है। बता दें विष्णु पुराण में कई ऐसी बताई गई हैं जिनका पालन करके आप सफल व्यक्ति बनने के साथ पुण्य प्राप्त कर सकते हैं। उन्हीं में से कुछ निम्न बताई गई है।

पहली बात शिक्षा को लेकर सवाल – कई लोगों की आदत होती हैं कि मेहमान के जीवन के बारे में हर एक बात जानना चाहता है। अगर कोई मेहमान घर आए तो उससे कभी भी यह नहीं पूछना चाहिए कि उसने कहां से और कितनी पढ़ाई की है। अगर वो कम पढ़ा-लिखा होगा तो हो सकता है कि आपते इस प्रश्न का उत्तर बताने में वह असहज हो जाए।

दूसरी बात है आमदनी– आज के समय में आमदनी सबसे बड़ी जरूरत बनती जा रही हैं। ऐसे में कोई कम तो कोई ज्यादा कमाता है। ऐसे में अगर आपके घर कोई मेहमान आए तो उससे कभी भी उसकी आमदनी को लेकर सवाल नहीं करना चाहिए। हो सकता है इससे उसको शर्मिंदगी महसूस हो।

तीसरी बात है जाति-धर्म– अगर आपके घर कोई मेहमान आता है तो उससे कभी भी जाति, धर्म या फिर गोत्र के बारे में नहीं पूछना चाहिए। हो सकता है कि इससे सामने वाले व्यक्ति को बुरा लग जाए। इससे बनते हुए रिश्ते भी बिगड़ सकते हैं।

इसके अतिरिक्त आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विष्णु पुराण में सृष्टि की रचना करने वाले भगवान विष्णु की लीलाओं का वर्णन है। विष्णु पुराण में वर्णन है कि कलयुग में पाप इतना अधिक बढ़ जाएगा कि सृष्टि का संतुलन बिगड़ जाएगा। ऐसे में मनुष्य को समय-समय पर पाप से बचे रहने की चेतावनी भी दी जाएगी, मगर मनुष्य इसे अनदेखा कर देंगे। इस पुराण में आयु के बारे में बताया गया है कि समय के साथ मनुष्यों की आयु सीमा घटती जाएगी। यहां तक कि मनुष्य की आयु का अंत बीस वर्ष में ही होने लगेगा। इसके अलावा कलयुग में लोगों के सिर के बाल कम उम्र में ही सफेद होने लगेंगे।

वहीं धर्म गुरुओं के बारे में इस पुराण में बताया गया है कि कलयुग में लोभी व्यक्ति विद्वान कहलाया जाने लगेगा। वहीं शास्त्रों और वेदों का कोई पालन भी नहीं करेगा। विवाह के बारे में इस पुराण में वर्णन किया गया है कि कलयुग में लोगों में एक-दूसरे के लिए समर्पण समाप्त हो जाएगा और विवाह मात्र समझौता बन कर रह जाएगा। कलयुग में जिस व्यतक्ति के पास जितना धन होगा वह उतना ही गुणी माना जाएगा और जिसके पास धन नहीं होगा वह अधर्मी, अपवित्र माना जाएगा। व्यतक्ति के कुल की पहचान धन के आधार पर ही की जाने लगेगी।

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