अमेरिकी इतिहास का वो काला दिन जिस दिन उस पर सबसे बड़ा आतंकवादी हमला हुआ। हजारों लोग मारे गए। कई हजार घायल हो गए। कई की तो लाश भी नहीं मिली। आर्थिक नुकसान हुआ जो अलग। अगर अमेरिका की जगह कोई दूसरा देश होता तो शायद इस हमले से उबर नहीं पाता, लेकिन अमेरिका ऐसे ही विश्व की महाशक्ति नहीं कहलाता है, इस हमले के गुनेहगारों को उनसे खोज-खोज कर या तो मार डाला या फिर जेल में सड़ा रहा है। आइए जानते हैं 11 सितंबर 2001 के दिन यह हमला कैसे किया गया था और क्या-काय हुआ था उस दिन?

चार विमानों का अपहरण

इस हमले को अंजाम अलकायदा ने दिया था। जिसे अफगानिस्तान में बैठकर ओसामा बिन लादेन ने रचा था। इस हमले के लिए अलकायदा ने एक ऐसी रणनीति बनाई थी, जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता था। अलकायदा ने इसमें बम, गोली, बारूद किसी का इस्तेमाल नहीं किया। उसने अमेरिका से ही 4 विमानों को हाईजैक किया और फिर उसी को क्रैश कराकर उसने हमले को अंजाम दिया। इसके लिए 19 आतंकियों को तैयार किया गया था। जिसमें 15 सऊदी अरब से थे, दो यूएई और एक-एक मिस्त्र और लेबनान से थे।

कहां गिरे थे विमान

11 सितंबर 2001 को मंगलवार का दिन था। सुबह आम दिनों जैसी ही थी। लोग दुनियादारी के कामों में व्यस्त थे। तभी अलकायदा ने उन्हें निशाना बना लिया। चार हाईजैक विमानों में से दो को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से टकरा दिया। जब पहला विमान टकराया तो लगा हादसा है, लेकिन जब कुछ देर बाद ही दूसरा हमला हुआ तो लोगों को समझ में आ गया कि ये हादसा नहीं आतंकी हमला है। हमले के दो घंटे के अंदर न्यूयॉर्क की शान ट्विन टावर मलबे में बदल गया।

तीसरे विमान को अमेरिका के रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन से टकरा दिया गया। वहीं चौथा विमान जिसका निशाना वाशिंगटन डीसी में स्थित कैपिटल बिल्डिंग थी वो पेन्सेल्विनिया के एक खेत में क्रैश कर गया। इस विमान में सवार लोगों और पायलट ने प्लेन को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश की थी, जिसके बाद यह क्रैश कर गया।

कितने लोगों की हुई थी मौत

इस हमले में मरने वालों का आधिकारिक डाटा 2977 लोगों की है। जिसमें चार विमानों में सवार 246 यात्रियों और चालक दल के लोग शामिल थे। इनमें से कोई नहीं बचा था। वहीं ट्विन टावर के गिरने से 2606 लोगों की मौत हो गई थी। पेंटागन पर हुए हमले में 125 लोगों की जान गई थी।

अमेरिका का बदला

इस हमले की जिम्मेदारी अलकायदा ने ली थी। तब अलकायदा अफगानिस्तान से सक्रिय था और आज भी उसकी जड़ें वहां जमी हुई हैं। हमले के बाद अमेरिका ने अलकायदा को खत्म करने की कसम खा ली। अफगानिस्तान पर हमला कर दिया। अलकायदा के पनाह देने के चक्कर में तालिबान फंसा और उसके भी कई नेता मारे गए, सत्ता तो गई ही। अमेरिका से डर कर अलकायदा का चीफ ओसमा बिन लादेन पाकिस्तान भाग गया, जहां पाकिस्तानी हुकूमत ने उसे पनाह दे दी। अमेरिका को जब इसका पता चला तो चुपचाप पाकिस्तान में घुसा और उसे वहीं मार गिराया।

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