रायपुर. मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल से विगत दिनों उनके निवास कार्यालय में यूनिसेफ इंडिया के प्रमुख श्री यासूमासा किमुरा ने सौजन्य मुलाकात की थी। श्री यासूमासा किमुरा ने पत्र के माध्यम से छत्तीसगढ़ में न्यूट्रिशन के क्षेत्र में अच्छे कार्यों के लिए मुख्यमंत्री श्री बघेल को बधाई दी हैं। पत्र में उन्होंने लिखा है कि छत्तीसगढ़ में कुपोषण मुक्ति अभियान के माध्यम से बच्चों में कुपोषण और महिलाओं में एनीमिया दूर करने के लिए राज्य में अच्छा काम हो रहा है। प्रदेश के प्रत्येक बच्चे के सभी अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध होकर काम किए जा रहे हैं। श्री किमुरा ने लिखा है कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में हेल्थ के क्षेत्र में हो रहे कार्यों की वजह से छत्तीसगढ़ के हेल्थ इंडेक्स में काफी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। यह उत्साहजनक है। यूनिसेफ इससे काफी प्रभावित है।
गौरतलब है कि यूनिसेफ इंडिया की टीम ने 10 से 15 सितंबर तक बस्तर अंचल के नारायणपुर, कोण्डागांव और बस्तर जिले का भ्रमण किया था और वहां स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, पेय जल, बच्चों की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री के द्वारा संचालित योजनाओं के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों को नजदीक से देखा। जिसमें ‘सीख‘ कार्यक्रम ने बच्चों को सीखने की प्रकिया को सतत जारी रखा है। ‘युवोदय‘ युवाओं को सशक्त करने के कार्यक्रम के रुप में बस्तर और कोंडागांव में चल रहा है।कोंडागांव जिले में मॉल न्यूट्रिशन और एनीमिया को नापने के लिए ऐप भी बनाया गया है, स्कूली बच्चों के लिए वॉश कार्यक्रम, दूरस्थ इलाकों में गर्भवती महिलाओं को योगा के माध्यम से सुरक्षित प्रसव, नारायणपुर के दूरस्थ क्षेत्रों में मोटर बाईक एंबुलेंस, हाट बाजार क्लीनिक योजनाओं की भी उन्होने प्रशंसा की।
मलेरिया उन्मूलन के क्षेत्र में भी काफी अच्छा काम हुआ है। जिससे मलेरिया के मामलों में कमी आई है। लोगों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं और उनकी दिक्कतें दूर हुई हैं। लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है। इस परिवर्तन को यूनिसेफ की टीम ने भी महसूस किया है।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की पहल पर कुपोषण और एनीमिया की समस्या के समाधान के लिए बस्तर अंचल से मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की शुरूआत की गई थी। जिसमें मिली सफलता को देखते हुए इस अभियान का पूरे राज्य में विस्तार किया गया है। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान से छत्तीसगढ़ में लगभग 2 लाख 10 हजार बच्चे कुपोषण से मुक्त हो चुके हैं। इसी तरह एक लाख महिलाएं एनीमिया से मुक्त हो चुकी हैं। इस अभियान के तहत बच्चों और महिलाओं को स्थानीय पोषक आहार, गरम भोजन, अण्डा, चिक्की, मूंगफली, चना, कुछ स्थानों पर मिलेट्स के साथ रेडी-टू-ईट पूरक पोषण आहार दिया जा रहा है। इस अभियान में महिला स्व-सहायता समूहों की मुख्य भागीदारी है।
यूनिसेफ इंडिया ने छत्तीसगढ़ में न्यूट्रिशन के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा की
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