पिछले छह महीनों में देश में कई प्रकार की बीमारियां पांव पसार रही है. कोविड से जूझते हुए मंकीपॉक्स वायरस भी आया और उससे लोग संक्रमित हो रहे हैं. बच्चों को टोमैटो फ्लू जैसी बीमारी हो रही है. इस फ्लू के केस लगातार सामने आ रहे हैं. कोरोना के केस भले ही कम हुए हैं, लेकिन ये वायरस अभी खत्म नहीं हुआ है. मौजूदा हालात में इंसान चारों ओर से कई बीमारियां से घिरा हुआ है. एक बीमारी कम होती तो दूसरी खड़ी हो जाती है. लगातार बढ़ती इन संक्रामक बीमारियों से लोग परेशान है और खुद का बचाव कर रहे हैं. अब इस बीच डेंगू भी पांव पसार रहा है. इस बुखार के केस तेजी से बढ़ रहे हैं. देश की राजधानी दिल्ली में डेंगू के मामले रफ्तार पकड़ रहे हैं. दिल्ली में सितंबर में इस बुखार के 152 केस आ चुके हैं. जो इस साल सबसे ज्यादा है. अस्पतालों में भी डेंगू के मरीज बढ़ रहे हैं. इन संक्रामक बीमारियां के बीच डेंगू के बढ़ते केस ने नई चिंता पैदा कर दी है. ऐसा इसलिए क्योंकि इन वायरस जनित बीमारियों की तरह डेंगू भी कई मामलों में जानलेवा साबित हो जाता है. पिछले साल दिल्ली में डेंगू से मौत के मामले भी सामने आए थे. ये बीमारी किसी भी उम्र के लोगों को निशाना बना सकती है.
लोगों के बीच सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे इन बीमारियां के बीच डेंगू की पहचान कैसे करें और इससे बचाव किस प्रकार किया जाए. एक ही समय में कई प्रकार की संक्रामक बीमारियों से घिरा इंसान बेबस भी नजर आ रहा है. अधिकतर लोगों को तो डेंगू के लक्षणों और टेस्ट के बारे में भी जानकारी नहीं है. बुखार होने पर लोग केवल कोविड जांच ही करा रहे हैं. लेकिन इसमें किसी की गलती भी नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि कोविड हो, मंकीपॉक्स या फिर टौमैटो फ्लू इन सभी बीमारियां का शुरुआती लक्षण बुखार होता है. ऐसे में इन बीमारियों के बीच फर्क करना बहुत मुश्किल हो रहा है. लक्षण बढऩे पर ही पता चल पाता है कि असल में व्यक्ति किससे संक्रमित हुआ है. लेकिन इस स्थिति में कई बार इलाज में देरी भी हो जाती है. ऐसे में अब यह जरूरी है कि डेंगू को लेकर भी सतर्क रहें. अगर किसी को बुखार है और वो दो दिन से ज्यादा समय तक बना हुआ है तो डेंगू की जांच भी जरूर करा लें. टेस्ट में अगर डेंगू की पुष्टि होती है तो खुद से इलाज की कोशिश न करें और डॉक्टर से सलाह लें. बुखार को केवल कोविड न समझें और अन्य टेस्ट भी कराएं. फिलहाल लोगों को एक साथ कई बीमारियां का खतरा है. बच्चों में टोमैटो फ्लू के केस लगातार आ रहे हैं. कुछ बच्चों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ रहा है. मंकीपॉक्स के मामले भले ही नहीं बढ़ रहे हैं, लेकिन कई राज्यों में संदिग्ध मरीजों का मिलना जारी है. कोविड के केस भले ही कम हुए हैं, लेकिन पुरानी बीमारी से पीड़ित मरीज को अगर कोविड होता है तो उसे अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत भी पड़ जाती है. ये तीनों ही संक्रामक बीमारी है और एक से दूसरे व्यक्ति में फैलती हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन बीमारियों को फैलाने वाले वायरस पूरी तरह सक्रिय है. भविष्य में कभी भी इनके केस बढ़ सकते हैं. ऐसे में डेंगू का पांव पसारना एक बड़ी चुनौती हो सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि अगर किसी व्यक्ति को कोविड और डेंगू एक साथ होता है ये खतरनाक माना जाता है. कई मामलों में डेंगू की वजह से मरीज को डेंगू शॉक सिंड्रोंम हो जाता है. ये एक बहुत ही खतरनाक स्थिति होती है. डेंगू की वजह से प्लेटलेट्स तेजी से कम होने लगती हैं. इस कमी से ब्लड वाहिकाओं से रिसाव होने लगता है. जिससे शरीर में खून की कमी हो जाती है और ये स्थिति शॉक सिंड्रोम की ओर ले जाती है. ऐसा होने पर मरीज को आईसीयू की जरूरत पड़ती है. कई मामलों में मौत होने की आशंका भी रहती है. बच्चों को भी इस बुखार से काफी खतरा रहता है और उनमें इससे डायरिया और तेज बुखार हो जाता है. ऐसे में जरूरी है कि लोग डेंगू को हल्के में न लें और इससे बचाव करें. वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. अजय कुमार का कहना है कि डेंगू से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि घर के आसपास कहीं भी पानी का जमाव न होने दें. इसके अलावा दिन में कोशिश करें कि पूरी बाजू के कपड़े पहनें और घर में मच्छरों को पनपने न दें. रात को सोते समय मच्छरदानी का भी प्रयोग कर सकते हैं. अगर किसी को बुखार हुआ है और दो दिन से ज्यादा समय तक बना हुआ है तो प्लेटलेट्स टेस्ट भी जरूर करा लें. डेंगू होने पर घबराएं नहीं और डॉक्टर से सलाह ले. आमतौर पर ये बुखार पांच से सात दिन में ठीक हो जाता है और डाइट ठीक रहने और समय पर दवा लेने से मरीज स्वस्थ रहता है. खानपान का ध्यान रखने से प्लेटलेट्स का स्तर के कम होने का खतरा भी कम होता है.

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