बायसी सीएचसी में संविदा चिकित्सक होते हुए 12 वर्षो से धरमजयगढ़ सिविल अस्पताल में है अटैच, कलेक्टर के निर्देश पर शुरु हुई जांच
रायगढ़। सिविल अस्पताल धरमजयगढ़ में अटैच संविदा आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. खुर्शीद खान की संदिग्ध कार्यप्रणाली को लेकर पहली बार कलेक्टर भीम सिंह के आदेश पर जांच कमेटी बनाई गई है। तीन डाक्टरों की यह कमेटी बायसी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में पदस्थ डॉ. खुर्शीद खान के 12 वर्षो से सिविल अस्पताल में नियम विरुद्ध अटैच रहने की पूरी कहानी को बेपर्दा करेगी।
जिले के आदिवासी बाहुल्य धरमजयगढ़ के सिविल अस्पताल में संविदा आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. खुर्शीद खान की पोस्टिंग को लेकर अब जिला प्रशासन ने संज्ञान में ले लिया है। दरअसल शासन ने डा. खुर्शीद खान की पोस्टिंग धरमजयगढ़ से 8 किलोमीटर दूर बायसी गांव के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में की है। बायसी की आबादी 4 हजार है ऐसे में लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने शासन ने एक संविदा आयुर्वेदिक चिकित्सक की पोस्टिंग की है लेकिन यह आश्चर्य का विषय है कि पिछले 12 वर्षो से डा. खुर्शीद खान सिविल अस्पताल धरमयजगढ़ में अटैच हैं हर बार उनकी संविदा नियुक्ति भी बढ़ जाती है। जबकि सिविल अस्पताल में न तो आयुर्वेदिक दवाई और न ही आयुर्वेदिक चिकित्सक का पद है। सिविल अस्पताल में आधे दर्जन एमबीबीएस डाक्टर पूर्व से ही पदस्थ है ऐसे में डा. खुर्शीद खान को लगातार धरमजयगढ़ सिविल अस्पताल में क्यो और कैसे अटैच किया जा रहा है। यह लोगों के समझ नहीं आ रहा है। जबकि एक संविदा कर्मचारी को उसके मुख्यालय से अलग कहीं भी पदस्थ नहीं किया जा सकता। बायसी मुख्यालय में डा. खुर्शीद के नहीं होने के कारण बायसी के ग्रामीणों को इलाज के लिए धरमजयगढ़ आना पड़ता है। सिविल अस्पताल में एलोपैथी पद्धति से इलाज किया जाता है ऐसे में एक आयुर्वेदिक चिकित्सक की वहां आवश्यकता ही नहीं है। हाल ही में धरमजयगढ़ के जागरुक लोगों ने सिविल अस्पताल में मनमानी को लेकर एक शिकायत कलेक्टर भीम सिंह से की थी। जिसमें डा. खुर्शीद खान की संदिग्ध गतिविधियों को लेकर लोगों ने उन्हे बायसी मुख्यालय भेजे जाने की मांग की थी। इसके साथ ही डा. खुर्शीद खान का पूरा चि_ा कलेक्टर के समक्ष पेश किया गया था। इसके कुछ दिन बाद ही कलेक्टर भीम सिंह, जिला पंचायत सीईओ, सीएमएचओ सहित अन्य अधिकारियों ने सिविल अस्पताल का निरीक्षण किया था। कलेक्टर ने शिकायत के बाद जिला आयुर्वेद अधिकारी डा. गौरी पटेल को डा. खुर्शीद पर लगाए गए गंभीर आरोपों की जांच करने का आदेश दिया था। कलेक्टर के आदेश पर आयुर्वेद अधिकारी ने तीन डाक्टरों की जांच कमेटी बनाई है। इस कमेटी में डा. सुभाष झा महापल्ली, डा. अशोक पाण्डेय भेडवन, डा. अवधेश महापात्र समकेरा शामिल है। कमेटी को 15 दिवस के भीतर जांच कर प्रतिवेदन भेजने कहा गया है। बहरहाल एक संविदा आयुर्वेदिक चिकित्सक द्वारा सिविल अस्पताल में एलोपैथी पद्धति से इलाज करने और उसके लगातार कई वर्षो से अटैच रहने की पूरी कहानी अब जांच कमेटी उजागर करेगी, ऐसा लगता है।
बीएमओ ने नहीं माना कलेक्टर का आदेश
सिविल अस्पताल धरमजयगढ़ के निरीक्षण में गए कलेक्टर भीम सिंह ने स्थानीय बुद्धिजीवियों की शिकायत पर तत्काल बीएमओ डा. भगत को डा. खुर्शीद खान को हटाने और उन्हे उनके मुख्यालय भेजने का आदेश दिया था। लेकिन बीएमओ ने कलेक्टर को गुमराह करने के साथ उनके आदेश का कोई पालन नहीं किया। यहां बता दें कि जिस तरह संविदा आयुर्वेद चिकित्सक डा. खुर्शीद 12 वर्षो से सिविल अस्पताल में पदस्थ हैं उसी तरह बीएमओ डा. बीएल भगत भी बीते 20 वर्षो से धरमजयगढ़ में ही पदस्थ हैं। प्रशासन न तो बीएमओ को अन्यत्र पदस्थ कर पा रही है और न ही डा. खुर्शीद खान के अवैध अटैचमेंट को समाप्त कर पा रही पा रही है। जांच कमेटी बनने के बाद बीएमओ और डा. खुर्शीद के गठजोड़ का भी पर्दाफाश हो सकेगा।
जिला स्तर पर बनी कमेटी : बीएमओ
इस संबंध में बीएमओ डॉ. बीएल भगत का कहना है कि कलेक्टर ने डा. खुर्शीद को मुख्यालय बायसी भेजने कहा है लेकिन कोविड-19 जांच के लिए उन्हे सप्ताह में 2 दिन सिविल अस्पताल में पदस्थ किया गया है। डा. खुर्शीद की शिकायत कलेक्टर से हुई है जिसकी जांच के लिए जिला स्तर पर एक कमेटी बनाई गई है।
15 दिनों पेश करेंगे जांच प्रतिवेदन:जिला आयुर्वेद अधिकारी
इस संबंध में जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. गौरी पटेल का कहना है कि डा. खुर्शीद खान की शिकायत कलेक्टर से की गई है। जिसमें खुर्शीद के मुख्यालय बायसी में न रहने और कई वर्षो से सिविल अस्पताल में अटैच रहने को लेकर शिकायत की गई है। इसके लिए 3 वरिष्ठ आयुर्वेदिक चिकित्सकों की कमेटी बनाई गई है जो 15 दिनों में जांच कर प्रतिवेदन पेश करेंगे। जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
