रायगढ़. बांजीपाली बस्ती वार्ड क्रमांक 33 में अपने परिवार के साथ रहने वाली श्रीमती सेवती श्रीवास कहती है कि परिवार में स्वयं एवं पति के साथ दो बेटे और तीन बेटियां है। 7 सदस्यों का पूरा परिवार कच्छे मकान में रहते थे। घर बहुत जर्जर था, जिससे बारिश, ठंड में बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। उनके पति सैलून का दुकान चलाते है, जो कमाई होता था वो परिवार के गुजर बसर में निकल जाता था। इसके बाद भी उन्होंने कुछ बचत किए लेकिन लड़कियों के शादी योग्य होने से वो पैसे शादी में खर्च हो गये। उनके लिए घर का बनना सपना सा लगने लगा, क्योंकि बचत के पैसे अब पूरे शादी में लग चूके थे, लेकिन पीएम आवास से आज उनका खुद का घर बन गया है।इसी प्रकार मिट्ठुमुड़ा जूटमिल बस्ती में निवासी श्रीमती शारदा बरेठ बताती है, वे लाण्ड्री का कार्य करते है। जिसमें बड़ी मुश्किल से परिवार का भरण पोषण हो पाता था। पति, पत्नी और बच्चे सभी कच्चे जर्जर मकान में रहते थे। वे बताती है दिक्कते तो बहुत थी, लेकिन बचत नहीं होने से स्वयं के पैसे से घर बनाना काफी मुश्किल था। लेकिन जब आवास योजना की जानकारी प्राप्त हुई तो उन्होंने आवेदन किया, आवेदन के स्वीकृत होने चार किस्तो में पैसे मिलने से आज खुद का पक्का घर मकान बन चुका है। मिलन दास महंत नगर पालिक निगम रायगढ़ अंतर्गत वार्ड क्रमांक 32 बांजी पालीबस्ती में अपने परिवार के साथ रहते हैं उन्होंने बताया कि वे जुटमिल में सुपरवाईजर के पद पर काम करते थे, चूँकि अब काम बंद हो जाने और उम्र भी ढल जाने के कारण काम नहीं कर पाते और पेंशन के भरोसे ही रहना पड़ता है और बेटी एवं दामाद ही काम करते हैं जिससे परिवार का रोजी-रोटी चल पाता है और इधर उम्र के साथ-साथ उनके कच्चे मकान की हालत भी ढलती जा रही थी और बचत कुछ भी नहीं हो पा रहा था, जिससे पक्के मकान बनाने की चिंता बढ़ती जा रही थी, तभी प्रधानमंत्री आवास योजना के बारे में पता चला और नगर पालिक निगम रायगढ़ कार्यालय में जाकर आवेदन जमा किया। स्वीकृति मिलने के बाद कच्चे मकान को तोड़कर पक्का मकान बना। मिलन दास ने बताया कि उनकी सारी चिंता दूर हो गयी है। वे अपने परिवार के साथ पक्का मकान में खुशी-खुशी रह रहे है।

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