पालक, लालभाजी, चुकंदर, हल्दी, पलाश के फूलों से समूह की महिलाएं बना रहीं गुलाल

कोरिया.

रंगों के त्योहार होली की खुशियों को दोगुनी करने जिले में स्व सहायता समूह की महिलाएं अभी से तैयारियों में जुट गई हैं। जिले में महिलाओं द्वारा हर्बल गुलाल बनाने का कार्य किया जा रहा है, गत वर्ष भी महिलाओं को हर्बल गुलाल से अच्छी आमदनी प्राप्त हुई थी। केमिकल युक्त रंग-गुलाल से त्वचा तथा स्वास्थ्य सम्बन्धी गम्भीर समस्याएं होतीं हैं, हर्बल गुलाल के प्राकृतिक रंगों के माध्यम से साइड इफेक्ट से भी छुटकारा मिलेगा।
जिले में कुल 05 स्व सहायता समूह की 21 महिलाओं द्वारा गुलाल बनाने की शुरुआत की गई है। विकासखण्ड बैकुण्ठपुर के ग्राम बस्ती की श्री राधे स्व सहायता समूह, ग्राम बड़गांव की मां अम्बे स्व सहायता समूह तथा विकासखण्ड सोनहत के ग्राम भैंसवार की सागर स्व सहायता समूह, ग्राम कटगोड़ी की क्रांति स्व सहायता समूह, सोनहत की संघर्ष स्व सहायता समूह की महिलाएं गुलाल बना रहीं हैं। महिलाओं ने अब तक लगभग 105 किलोग्राम गुलाल तैयार किया है। जिले में विभिन्न स्थानों पर स्टॉल लगाकर गुलाल विक्रय किया जाएगा, इसके साथ ही सी मार्ट में भी हर्बल गुलाल उपलब्ध होंगे।

ऐसे बन रहा हर्बल गुलाल-
समूह की महिलाओं ने बताया कि उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के अंतर्गत प्रशिक्षण दिया गया।समूह की महिला अनुपमा बेक ने बताया कि गुलाल बनाने हेतु अरारोट पाउडर के साथ प्राकृतिक रंगों के अर्क को मिलाया जाता है। स्थानीय बाजार में अरारोट पाउडर आसानी से उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि गुलाबी रंग हेतु चुकंदर, हरे रंग हेतु पालक, पीले हेतु हल्दी, नारंगी हेतु पलाश के फूलों का उपयोग किया जा रहा है इसी प्रकार अन्य रंगों के लिए भी फूलों तथा सब्जियों का उपयोग किया जा रहा है। जिन्हें पानी के साथ पीसकर पेस्ट के रूप में बनाकर सुखाया जाता है तथा छानकर प्राकृतिक सुंगन्धक का प्रयोग कर गुलाल तैयार होता है।

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