देश के मशहूर शायर राहत इंदौरी का मंगलवार को हॉर्ट अटैक के चलते निधन हो गया है. इसके पहले सोमवार की देर रात उनकी तबीयत खराब होने की वजह से उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया था, जहां पर 70 वर्षीय इंदौरी को कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई. मध्य प्रदेश के राहत साहब दुनिया को तो अलविदा कह गए लेकिन पीछे अदब-ओ- शायरी की ऐसी विरासत छोड़ गए जो नई पीढय़िों के लिए बहुत ही मूल्यवान साबित होंगी. आइए आपको राहत इंदौरी साहब के विषय में कुछ खास बातें बताते हैं. राहत इंदौरी साहब का जन्म 1 जनवरी 1950 को रविवार के दिन हुआ था. इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक ये 1369 हिजरी थी तारीक 12 रबी उल अव्वल थी. इसी दिन रिफअत उल्लाह साहब के घर राहत साहब की पैदाइश हुई. उनके पिता रिफअत उल्लाह सन 1942 में सोनकछ देवास जिले से इंदौर आए थे, तब शायद ही उन्होंने कभी ये सोचा हो कि उनका बेटा आने वाले समय में एक दिन अपने शहर को एक नई पहचान देगा. राहत साहब के बचपन का नाम कामिल था बाद में इनका नाम बदलकर राहत उल्लाह कर दिया गया. राहत साहब का बचपन बहुत ही गरीबी मुफलिसी में बीता. इनके पिता ने इंदौर में आने के बाद ऑटो चलाया मिल में भी काम किया. ये दूसरे विश्वयुद्ध (1939-1945) का दौर चल रहा था जब देश में आर्थिक मंदी छाई हुई थी. (एजेंसी)
