बेमेतरा। अभी वर्तमान में खरीफ फसलों की बोनी हो चुकी है। खरीफ फसल के रूप में कृषकों द्वारा मुख्यत: धान व सोयाबीन की फसल ली जाती है, साथ ही सब्जियों की फसल ली गई है। अभी वर्तमान में अब कीट ब्याधियों के रूप में कृषक भाईयों के लिए नई समस्या की शुरूआत हो चुकी है। अत: कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. जी. पी. आयम ने कृषकों को समस्या की शुरूआत से ही उसके प्रति जागरूक रहने कहा। उन्हें खेत की सतत् निगरानी रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा की खाद व उर्वरक की संतुलित मात्रा का उपयोग करें। युरिया का प्रयोग एक बार में ही न करके तीन बराबर मात्रा बॉट कर दें। कृषकों को सलाह है कि 20-25 किग्रा/एकड़ की दर से युरिया की टॉप ड्रेसिंग करें साथ ही 08-10 किग्रा. म्युरेट ऑफ पोटाश/एकड़ का छिड़काव करे। कीट वैज्ञानिक डॉ (श्रीमती) एकता ताम्रकार ने सोयाबीन, धान, टमाटर, बैगन, भिण्डी की फसल में लगने वाले कीटों व रोगों के संबंध में बताया। उन्होने बताया की वर्तमान में धान की फसल में तना छेदक कीट का प्रकोप की शुरूआत हो गई है। अत: इसकी रोकथाम हेतु कार्टाफ हाइड्रोक्लोराइड 4: दानेदार दवा 10 किग्रा. प्रति एकड़ या क्लोरेन्ट्रिनिलीप्रोल 0.4: दानेदार दवा 4 किग्रा. प्रति एकड़ या फ्लूबेंडामाइड 20: डब्ल्यूजी 50 ग्रा. प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करें। सोयाबीन की फसल में चुसक कीट की रोकथाम के लिए इमिडाक्लोप्रिड दवा 17.8: एसएल 50 से 75 मिली./एकड़ या एसिटामिप्रिड 20: एसपी 250 ग्राम/एकड़ का प्रयोग करें। टमाटर व बैगन में फली-बेधक कीट की रोकथाम के लिए इन्डोक्साकार्ब 14.5: एससी 80 मिली./एकड़ या स्पाइनोसेड दवा 45: एससी 80 मिली./एकड़ की दर से प्रयोग करें। बरबट्टी भिण्डी व मिर्ची मैनी कीट के लिए इमिडाक्लोप्रिड दवा 17.8: एसएल 50 से 75 मिली./एकड़ या इथोफेनप्राक्स 10: ईसी 280 मिली/एकड़ या थायोमेथोक्सम 25: डब्ल्यूजी 40 ग्राम/एकड़ की दर से प्रयोग करें। डॉ. (श्रीमती) प्रज्ञा पाण्डेय की किसान भाईयों को सलाह है कि खेतों में लगातार पानी भरकर न रखें, देरी होने की स्थिति में इस माह रोपाई कर रहें है तो पौधे की दूरी कम रखें व 3-4 पौधों का उपयोग करें। हरी काई के प्रकोप की स्थिति में जिस जगह से पानी अंदर आता है वहॉ कॉपर सल्फेट को पोटली में बांधकर रखें। सोयाबीन की खेत में जल भराव न होने दें एवं जल निकास की उचित व्यवस्था रखें। उद्यानिकी वैज्ञानिक डॉ. चेतना बंजारे ने कहा कि खरीफ प्याज की खेत में रोपाई करें। शिमला मिर्च की नर्सरी तैयार करें तथा केले के वाटर सर्कस निकालने का कार्य करते रहें एवं जिन पौधों में फूल या फल आया हो तुरन्त बंास लगाकर सहारा दें। मत्स्यिकी वैज्ञानिक श्री तोषण ठाकुर की सलाह है कि मछली पालक कृषक कार्प मिश्रित मछली पालन हेतु तालाबो में मछली बीज संचयन से पहले गोबर खाद की प्रथम खुराक 2 टन/हे. की दर से उपयोग करने के उपरान्त तालाब में प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता या तालाब की स्थिति के अनुसार कार्प मछली की विभिन्न प्रजातियों का संचयन 6,000-10,000 नग मछली बीज प्रति हेक्ट. जल क्षेत्र की दर से करें। बारहमासी तालाब में फा्रई साइज के मछली बीज का संचयन न करें। अंगुलीका साईज के मत्स्य बीज का संचयन करे। मछलियों के अधिक बड़वार हेतु प्रतिदिन मछलियों के शारीरिक भार के 3: के आधार पर स्थानीय रूप से उपलब्ध परिपुरक आहार या फिर पैलेटेड फीड का आहार मछलियों को दें।

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