रायपुर। भारत के 74 वें स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय पर्व को स्पर्श सामाजिक एवं शैक्षणिक संस्थान न्यू चंगोराभाठा रायपुर में बहुत ही धूमधाम से मनाया गया। स्पर्श के अध्यक्ष डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर ने संस्थान में झंडोत्तोलन किया। स्वतंत्रता दिवस के इस पावन अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए डॉ.पुरुषोत्तम चंद्राकर ने आजादी के उन सभी मतवालों को सादर नमन करते हुए कहा कि स्वंतत्रता अखंड धरती के सूक्ष्म अंश की एक परिसीमा को भारत के नाम से रेखांकित किया गया है। धरती को रोटी के टुकड़े की तरह अलग-विलग काटा नहीं जा सकता, बस ऊपर से रेखा खींच कर मेरा और तेरा में विभाजित किया जाता है। भारत मेरा देश और मेरा देश महान है। यहाँ वेद और ऋचायें की तरंगें तरंगायित होती है। संस्कार और संस्कृति की खूशबू प्रवाहित होती है। 1947 से 2020 तक 74 सालों में वस्तुगत् विकास बहुत हुआ है किंतु चैतन्यगत विकास नहीं बल्कि ह्रास हुआ है। डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर ने कहा कि विकास के नाम पर सुख, सुविधाएं, साधन-संपन्नताएं बढ़ी है, इसके साथ साथ चिंता, तनाव, द्वंद, द्वेष भी बढ़ा है, इन कारणों से व्यक्तियों में घूटन, परिवार-समाज में फूटन और प्रकृति में प्रदूषण व्याप्त है। देश की बागडोर मनुष्य के हाथों में होती है। देश की उन्नति व अवनति में हम सब की भागीदारी होती है। हम चाहें तो इसे स्वर्ग बना लें, चाहे तो नर्क। स्वर्ग बनाने के लिये एक-एक व्यक्ति, केवल एक को सुधारने की जिम्मेदारी लें, अनेकों की नहीं और वह एक हम स्वयं ही होंगे। हम स्वयं ही स्वयं को नियंत्रित कर लें यही ही असल स्वतंत्रता है। स्वतंत्रता = स्व द्वारा तंत्रित ( नियंत्रित ) होना। मन की गुलामी से मुक्त होकर (स्वतंत्र होकर)मानवीय पथ पर अग्रसित होवें। स्वतंत्रता दिवस के इस पावन अवसर पर उपस्थित सभी लोगों को डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर ने स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी एवं कोरोना काल के इस विपदा से सबको सजग रहने की सलाह दी। कार्यक्रम में सुश्री रात्रि लहरी, लोक गायिका चंपा निषाद, पद्मिनी वर्मा, पुनीता चंद्रा, कविता कुंभज, ललित काकडे, शंकर पार्थ ठाकरे, सुदर्शन वर्मा, चंद्रकांत देवांगन, स्नेहा नानवाणी, भूमिका यादव, आरती गोस्वामी, काजल दुबे, डाली साहू, उमा शर्मा, विद्या साहू, आदि उपस्थित रहे।
