आम तौर पर Monsoon Kerala में एक जून को दस्तक देता है। गर्मी से राहत और खेती-किसानी के लिहाज से मॉनसून की बारिश बेहद अहम मानी जाती है। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस साल केरल में मानसून की शुरुआत में तीन दिन की देरी की आशंका जताई है। मंगलवार को अपने पूर्वानुमान मौसम विभाग ने कहा कि मानसून की बारिश की शुरुआत 4 जून को होने की उम्मीद है। IMD का अनुमान है कि पहले के पूर्वानुमान के अनुसार एरर मार्जिन +/- 4 दिन था यानी एक जून से चार-पांच दिन पहले या बाद केरल में मानसून की शुरुआत हो सकती है।
मौसम विभाग के अलावा, निजी फोरकास्टर स्काईमेट वेदर ने एरर मार्जिन +/- 3 दिन के साथ 7 जून को मानसून की बारिश शुरू हो सकती है। अनुमान के अनुसार, प्रायद्वीपीय भारत में मानसून धीमी गति से आगे बढ़ेगा। भरपूर मानसून खरीफ फसल होने पर मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने में मदद मिलती है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए ये बेहद महत्वपूर्ण है।कृषि मंत्रालय के अनुसार, देश की खेती का 51%, उत्पादन का 40% हिस्सा वर्षा आधारित है। ऐसे में मानसून बेहद महत्वपूर्ण है। मानसून की बारिश पर हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में एक सर्वे के मुताबिक देश की 47% आबादी अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। इसका ग्रामीण अर्थव्यवस्था के साथ सीधा संबंध है। स्काईमेट ने कहा कि मानसून की धीमी प्रगति “खरीफ की बुवाई के लिए अच्छी तरह से नहीं हो सकती है। अल नीनो के कारण खराब मानसून की आशंका भी है। दुनियाभर में अल नीनो का के कारण बारिश, ठंड, गर्मी सब में अंतर दिखाई देता हैं। इसके कारण कहीं सूखा पड़ता है तो कहीं बाढ़ आ जाती है।
इस साल आईएमडी ने लंबी अवधि के औसत (LPA) के 96% (+/-5% के त्रुटि मार्जिन के साथ) पर “सामान्य” मानसून की भी भविष्यवाणी की है। जून से सितंबर के बीच मानसून के मौसम के लिए एलपीए 87 सेमी है। LPA की गणना 1971 से 2020 की अवधि में हुई है। हालांकि, स्काईमेट वेदर ने मानसून के मौसम के दौरान “सामान्य से कम” बारिश का अनुमान लगाया है। इसके अनुसार, “सामान्य” मानसून की 35% संभावना और उसके बाद “सामान्य से नीचे” मानसून की 29% संभावना है। आईएमडी ने पिछले महीने जारी पूर्वानुमान में कहा कि “कम” मानसून की 22% संभावना और “सामान्य से ऊपर” मानसून की केवल 11% और “अधिक” मानसून वर्ष की केवल 3% संभावना है।

