अस्थायी मुर्दाघर बने स्कूल बिल्डिंग को गिराया गया…
ओडिशा के बालासोर का बहानगा बाजार रेलवे स्टेशन. एक हफ्ते पहले (2 जून) इस स्टेशन के नजदीक ही वह भीषण ट्रेन हादसा हुआ था, जिसमें 288 लोगों की मौत हो गई. सात दिन बीत जाने के बाद भी अब तक बहानगा बाजार के लोगों के जहन से हादसे की तस्वीरें नहीं निकल पा रही हैं.
बहानगा बाजार इलाके में रहने वाले लोग लगातार यह शिकायत कर रहे थे कि हादसे वाली जगह के पास अब भी कई शव हो सकते हैं. क्योंकि, वहां से गुजरते वक्त उन्हें एक अजीब सी महक आती है. शिकायत के बाद रेलवे अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया. हालांकि, इस जांच में घटनास्थल पर कहीं कोई शव नहीं मिला.
दक्षिण पूर्व रेलवे के सीपीआरओ आदित्य कुमार चौधरी ने कहा कि एनडीआरएफ ने हादसे वाली जगह का 2 बार निरीक्षण करने के बाद साइट क्लीयरेंस दिया है. इसके बाद लोगों की शिकायत मिलने पर राज्य सरकार की टीम ने भी दोबारा घटनास्थल की तलाशी ली. चौधरी के मुताबिक घटनास्थल से स्मेल अंडों के कारण आ रही थी.
ट्रेन दुर्घटना के वक्त टूट गए थे 4 टन अंडे
उन्होंने बताया कि यशवंतपुर-हावड़ा एक्सप्रेस में लगभग 4 टन अंडे लोड किए गए थे. हादसे के बाद पूरे अंडे मौके पर टूट गए. दुर्घटना के 7 दिन बाद अंडे सड़ चुके हैं, जिसके कारण वहां दुर्गंध आ रही है. उन्होंने आगे कहा कि मौके से क्षतिग्रस्त अंडों को हटाने के लिए बालासोर नगर पालिका की मदद ली जा रही है.
स्कूल को बनाया गया था अस्थायी मुर्दाघर
इससे पहले बहानगा के हाई स्कूल में पढऩे वाले छात्रों ने वहां पढऩे से इनकार कर दिया था. दरअसल, हादसे के बाद जब वहां लाशों का ढेर लग गया था. तब बहानगा के हाई स्कूल को अस्थायी मुर्दाघर बना दिया गया था. पहले शव रखने के लिए स्कूल के 3 कमरे खोले गए थे. लेकिन बाद में शवों की पहचान करने के लिए स्कूल के मुख्य हॉल का भी इस्तेमाल किया गया.
65 साल पुरानी स्कूल बिल्डिंग गिराई
छात्रों के विरोध के बाद 65 साल पुराने स्कूल को शुक्रवार को ढहा दिया गया. दरअसल, छात्रों के परिजनों ने भी उन्हें स्कूल भेजने से इनकार कर दिया था. उनका कहना था कि टीवी पर शवों की फोटो देखने के बाद अब उनके बच्चे स्कूल नहीं जाना चाहते. अभिभावकों ने मांग की थी कि इस स्कूल की बिल्डिंग को गिराकर नई बिल्डिंग बनाई जाए.
स्कूल और स्थानीय लोगों ने ट्रेन दुर्घटना के दौरान बचाव और राहत अभियान में बहुत योगदान दिया था. जिला कलेक्टर ने कहा था कि उन्होंने स्कूल समिति से बिल्डिंग गिराने की मांग के बारे में एक प्रस्ताव पारित करने और इसे सरकार को सौंपने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने यह भी कहा था कि स्कूल की इमारत पुरानी है और अक्सर बाढ़ के दौरान लोगों को आश्रय देने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है. परिवर्तन कार्यक्रम के तहत स्कूल का नवीनीकरण किया जा सकता है.
ओडिशा के बालासोर में कैसे हुआ हादसा?
रेलवे की तरफ से बताया गया कि ट्रेन नंबर 12481 कोरोमंडल एक्सप्रेस बहानगा बाजार स्टेशन के (शालीमार-मद्रास) मेन लाइन से गुजर रही थी, उसी वक्त डिरेल होकर वो अप लूप लाइन पर खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई. ट्रेन पूरी रफ्तार (फुल स्पीड) में थी, इसका परिणाम यह हुआ कि 21 कोच पटरी से उतर गए और 3 कोच डाउन लाइन पर चले गए.
मालगाड़ी से जा भिड़े थे ट्रेन के डिब्बे
दरअसल, बहानगा बाजार स्टेशन पर इन ट्रेन का स्टॉपेज नहीं है. ऐसे में दोनों ही ट्रेनों की रफ्तार तेज थी. बहानगा बाजार स्टेशन से गुजर रही कोरोमंडल एक्सप्रेस अचानक पटरी से उतरी तो ट्रेन के कुछ डिब्बे मालगाड़ी से जा भिड़े. इसी दौरान हादसे के समय डाउन लाइन से गुजर रही यशवंतपुर-हावड़ा एक्सप्रेस के पीछे के दो डिब्बे भी पटरी से उतरी कोरोमंडल एक्सप्रेस की चपेट में आ गए. हादसा भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन से करीब 171 किलोमीटर और खडग़पुर रेलवे स्टेशन से करीब 166 किलोमीटर दूर स्थित बालासोर जिले के बहानगा बाजार स्टेशन पर हुआ. (aajtak.in)
बालासोर ट्रेन हादसा : जिस ट्रेन हादसों में हुई थी 288 लोगों की मौत…उसमें रखा था 4 टन अंडा….7 दिन बाद भी क्यों आ रही अजीब महक….
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