बीते दो दशकों से ज्यादा समय हो गया हमें महिला सशक्तीकरण पर बात होते हुए। इसका असर भी दिखाई देने लगा है बेटियाँ अब बेटों पर भारी पड़ने लगी हैं। इस साई फाई दौर में भी अभी-भी बेटियों को बेटों से कमतर करके आंका जा रहा है यह भी साफ है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि स्वयं बेटियों में आत्मविश्वास की कमी नजर आ रही है। वे स्वयं में वो आत्मविश्वास नहीं जगा पा रही हैं जो लड़कों में दिखाई देता है। ऐसे में जरूर है कि हम अपनी बेटियों में आत्मविश्वास जगाएँ, ताकि वह समाज को मुँह तोड़ जवाब दे सकें और अपना भला-बुरा अपने स्वविवेक के साथ कर सकें। आज हम अपने पाठकों को कुछ ऐसे उपाय बताने जा रहे हैं जिनके जरिये वे अपनी बेटी में उस आत्मविश्वास को जगा सकते हैं, जो उसमें है, लेकिन जो हमारी परम्पराओं के चलते दब गया
है।
जिम्मेदारीडालें
बाहर के कामों के लिए ज्यादातर बेटों को आगे किया जाता है। बेटियों से ऐसे काम मजबूरी पड़ने पर ही लिए जाते हैं। लेकिन आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए आपको ये फर्क करना बंद करना होगा। बैंक जाना, बिल जमा करना, घर के सदस्य को क्लीनिक ले जाना जैसे काम आपको शुरू से ही बेटी से भी करवाने चाहिए।
खुदसेप्रेमकरनासिखाएं
लड़कियों को आइने से बहुत प्यार होता है। उनके इस प्रेम के आड़े मत आइए। इस सहारे वो अपने शरीर से प्यार करने लगती हैं। ऐसे में वो जैसी हैं खुद को वैसा ही स्वीकारना सीखती हैं। बॉडी शेमिंग महिलाओं के आत्मविश्वास को तोड़ देती है। खुद से प्रेम करना सीखेंगी तो बॉडी शेमिंग का भाव नहीं आ पाएगा। साथ ही आप भी ध्यान रखें कि बेटी के सामने उसके रंग और रूप कि चिंता न जताएं।
अपने विचारों को रखने का मौका दें
इतिहास गवाह है कि ज्यादातर लड़की होने के नाते बेटियों को अपने मन की बातें कहने से रोका गया है। अब आप वो साहस बने जिससे वो अपने दिल की बात सबके सामने कहने का बल पाए। बेटी क्या चाहती है ये आप तो जानने की कोशिश करें ही उसे सबके सामने शेयर करने का आत्मविश्वास भी दें।
बाहरनिकलनेकीआजादी
कितना बोलती हो? कहां जाना है? छज्जे में क्यों खड़ी होती हो? देर तक बाहर क्यों? बड़े परिचित से सवाल हैं जो अक्सर सिर्फ महिलाओं से ही किए जाते हैं। ये करके आप उन्हें सिर्फ डरना सिखाते
हैं। बाहर निकलना, लोगों से बात करने की कला उन्हें शुरू से सिखाने की जरूरत है। माना कि बाहरी कारणों से आपको अपनी बेटी की सबसे ज्यादा चिंता होती है, ऐसे में आप उनपर दूसरे तरीके से नजर रख सकते हैं।अपनीआवाजउठानासिखाएं
बेटियों को अपने मन की बात कहने पर या अपनी आवाज उठाने पर अक्सर डांट दिया जाता है। जिससे उनके अंदर आत्मविश्वास की कमी होने लगती है। ऐसे में बेटियों को कॉन्फिडेंट बनाने के लिए जरूरी है, कि उन्हें अपनी बात कहने के लिए प्रेरित किया जाए। उनके मन की बात को सुना और समझा जाये। जिससे बेटियां खुलकर अपनी बात कहना सीख सकें। साथ ही वो गलत बात के लिए अपनी आवाज को बुलंद करने की हिम्मत कर सकें। जिससे उनके साथ कुछ गलत न हो
सके।
आत्मरक्षासिखाएं
बेटी होते ही माता पिता में एक डर घर कर जाता है। वो डर है समाजिक कुरीतियों और असमाजिक तत्वों का। डर है आपका लेकिन इससे बेटी का पूरा जीवन प्रभावित होता है। उसे अहसास कराइए कि आप उसके साथ हैं। असमाजिक तत्वों से निपटने के लिए तैयारी की जरूरत है। बेटी को आत्मरक्षा के गुर देने की जरूरत है। तभी एक सशक्त महिला तैयार हो सकती है।
खुदसेप्यारऔरसम्मानकरनासिखाएं
बेटी और बेटे में सिवाय जेंडर के और कोई फर्क अब नहीं रह गया है। इसलिए उनको प्यार करें और उनका सम्मान करें। साथ ही उनको खुद से प्यार करना और खुद का सम्मान करना भी सिखाएं। जिससे वो अपनी अहमियत समझें और दूसरे भी उनका सम्मान करें। बेटियों को बताएं कि गलत बात का विरोध करना ज़रूरी है। इसके लिए अगर कोई उन्हें नापसंद भी करे, तो भी उसको इसके लिए तैयार रहना चाहिए। इससे आपकी बेटी का हौसला बढ़ेगा और वो अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती जाएगी।

