रायपुर। राज्य के विभिन्न जिलों में बने गौठानों में अब खाद बनाने का सिलसिला तेज हो गया है। सुराजी गांव योजना के तहत बिलासपुर जिले के चार विकासखंडों में ग्रामीण क्षेत्रों के 72 गोठानों में स्व सहायता समूहों द्वारा 2 हजार 650 क्विंटल से अधिक खाद का उत्पादन किया गया है। जिनमें 700 क्विंटल से अधिक खाद बेचे भी जा चुके है। जिले के विकासखंड बिल्हा, कोटा, मस्तूरी एवं तखतपुर के ग्रामीण क्षेत्रों के गोठानों में 103 वर्मी बेड, 407 वर्मी टैंक, 342 नाडेप टांका, स्थापित है जिनके माध्यम से 940 क्विंटल वर्मी खाद और 1752 क्विंटल नाडेप खाद का उत्पादन किया गया है। बिल्हा विकासखंड के 21 गोठानों में 1671 क्विंटल खाद, कोटा के 15 गौठानों में 609 क्विंटल, मस्तूरी के 19 गौठानों में 82 क्विंटल और तखतपुर के 17 गोठानों में 287 क्विंटल खाद बनाया गया है। निर्मित खादों को उद्यानिकी विभाग, वन विभाग की नर्सरियों में उपयोग किया जा रहा है। इससे जैविक खेती को बढ़ावा मिलने के साथ साथ स्व सहायता समूहों की आय भी हो रही है।

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