इस वर्ष 2023 में हरेली त्यौहार श्रावण अमावस्या 17 जुलाई दिन सोमवार को मनाया जाएगा। अर्थात 2023 में हरेली तिहार छत्तीसगढ़ में जुलाई महीने की 17 तारीख को है।

हरेली तिहार का महत्व – हरेली तिहार छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार है छत्तीसगढ़ में सर्व प्रथम hareli tyohar को मनाया जाता है। छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान राज्य है इसे धान का कटोरा कहा जाता है यहां के लोग कृषि आधारित जीवकोपार्जन एवं व्यवसाय करते हैं।

Hareli tihar किसानों के लिए खास महत्व है, हरेली तिहार हरियाली का प्रतीक है जो कि किसानों एवं खेत खलिहानों एवं फसल से सीधा ताल्लुक रखता है। इसलिए छत्तीसगढ़ में हरेली तिहार का महत्व है। हरेली त्यौहार क्यों मनाया जाता है? Hareli tyohar हरियाली का प्रतीक माना जाता है किसान अपनी फसल की सुरक्षा एवं हरा-भरा की कामना करते हुए हरेली त्यौहार मनाते हैं। जब किसान आषाढ़ के महिने में अपने खेत में फसल उगाता है तो श्रावण महीने के आते धान की फसल हरा-भरा हो जाता है तब किसान अपनी फसल की सुरक्षा हेतु हरेली तिहार hareli tihar मनाते हैं।
हरेली त्यौहार किस राज्य में मनाया जाता है? छत्तीसगढ़ में प्रमुख फसल धान है यहां के किसान मुख्य रूप से ज्यादातर धान की खेती करते हैं अतः प्रमुखता: छत्तीसगढ़ राज्य में हरेली त्यौहार hareli tihar मनाया जाता है। Hareli Tihar छत्तीसगढ़ का पहला त्योहार है हरेली त्यौहार को पारम्परिक एवं लोक पर्व माना जाता है। छत्तीसगढ़ में हरेली त्योहार को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। हरेली त्यौहार के दिन किसान अपनी खेती बाड़ी में काम आने वाली सभी औजार हल, फावड़ा, कुदाली और आधुनिक कृषि यंत्र जैसे ट्रेक्टर आदि को को नहलाकर पूजा की जाती है।

हरेली तिहार के दिन किसान अपनी फसल की बीमारी कीट पतंगों से रक्षा हेतु पारंपरिक तरीके से पूजा करते हैं। पूजा में धूप दीप जावल के साथ साथ दशमूल पौधे की टहनी एवं बेलवा की टहनी लाकर अपने खड़ी फसल की पूजा करते हैं। किसानों की मान्यता है कि दशमूल की कांटेदार टहनी एवं बेलवा की टहनी फसल की बीमारी कीट पतंगों से सुरक्षा प्रदान करती है।

Hareli Tihar के दिन लोग सभी अपने घर में छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध मिष्ठान चिला रोटी तवे में भून कर चिला रोटी का प्रसाद भी पूजा में अर्पण करते हैं तथा चिला रोटी का प्रसाद बांटते हैं। हरेली तिहार के दिन बांस की लकड़ी से बनाई गई गेड़ी का उपयोग किया जाता है, छत्तीसगढ़ राज्य सांस्कृतिक लोक पर्व का धरोहर कहा जाता है hareli tihar भी सांस्कृतिक लोक पर्व है। इस दिन से बच्चे गेड़ी बनाकर चढ़ते हैं तथा पोला त्योहार को गेड़ी तोड़ते हैं। हरेली त्योहार के दिन गांव के झाकर बैगा लोग घर घर जाकर दशमूल पौधे एवं बेलवा की पत्ती बांधते हैं ताकि गांव में भी किसी प्रकार की बीमारी न आए। किसान hareli tihar के दिन उपवास व्रत रखते हैं और फसल एवं औजार की पूजा करते हैं।

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