छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने जिला कलेक्टर सभाकक्ष बालोद में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों पर सुनवाई की। छत्तीगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में आज बालोद जिला प्रकरणों की सुनवाई हुई। बालोद जिले में आयोजित जन सुनवाई में 13 प्रकरण प्रस्तुत हुए।

एक प्रकरण में आवेदिका से बिना तलाक लिए अनावेदक ने दूसरी लड़की से 2020 कोविड के पहले लॉकडाउन के समय मंदिर में विवाह कर लिया था। अनावेदक ने दूसरा विवाह स्वीकारा। आवेदिका ने अपनी शादी का सामान वापस मांगा जिसमें आयोग के पूछने पर अनावेदकगणों ने सामान वापस देने में अपनी सहमति दी। आयोग द्वारा बालोद जिला के संरक्षण अधिकारी को सामान वापस दिलाने में अधिकृत किया गया। दोनों पक्षों की सहमति पर 23 जुलाई को आवेदिका का सामान वापस दिलाया जायेगा। आयोग ने जरूरत पड़ने पर दुर्ग जिला के संरक्षण अधिकारी की सहायता लेने के लिए कहा। सामान वापस मिलने पर आवेदिका आयोग को 15 दिवस के भीतर सुचित करेंगी उसके बाद प्रकरण नस्तीबद्ध किया जायेगा।

अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि अनावेदिका उसकी बहु है। अनावेदिका का 5 साल तक प्रेम प्रसंग चलने के कारण लड़के से विवाह हुआ था। आवेदिका की दखल अंदाजी के कारण विवाह टूटने के कगार पर है। आवेदिका ने बताया कि अनावेदिका उसके पति को छोड़कर चली गई थी। दोनों पक्षों में भरण पोषण का मामला न्यायालय में मामले चल रहा है। आयोग की समझाइश पर दोनों पक्ष आपस में सुलह करने को तैयार हुए। आयोग ने अंतिम अवसर देते हुए दोनों पक्षों को रायपुर में बुलवाएगी। सुलहनामा नहीं होने को स्थिति में प्रकरण नस्तीबद्ध कर दिया जायेगा। एक प्रकरण में आवेदिका ने अपने भतीजे के खिलाफ प्रकरण लगाया है दोनों पक्षों को सुनने के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि अदिका के पति के पूर्व पत्नि का एक पुत्र हैदराबाद में कार्यरत है। आवेदिका अपने सास की संपत्ति पर हक जताने के लिए विवाद कर रही है। आवेदिका को समझाईस दिया गया कि अपने सास की संपत्ति पर दावा नहीं कर सकती। उसका बेटा ही उस संपत्ति पर दावा कर सकता है। अतः प्रकरण को आयोग ने नस्तीबद्ध किया।

एक अन्य प्रकरण में आवेदिका के द्वारा जानकारी दिया गया कि सरपंच द्वारा 9 व्यक्तियों के अवैधानिक कब्जा को हटाने के जगह उनका ही घर तोड़ा गया है और सभी सामान को जब्त कर लिया गया है। इनका प्रकरण राजस्व न्यायालय में चल रहा है। अनावेदक ने बताया कि राजस्व विभाग के आदेश पर पुलिस विभाग और पटवारी की उपस्थिति में उसका घर तोडकर पंचनामा बनाया है। और उनका सामान सुरक्षित रखा गया है। इनका प्रकरण राजस्व न्यायालय में चल रहा है। प्रकरण आयोग द्वारा नस्तीबद्ध किया गया। एक प्रकरण में आवेदिका की पुत्री जो अनावेदक की पत्नि थी। उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी जिसका मर्ज कायम हुआ है। जिसका बिसरा रिपोर्ट नहीं मिला है और आवेदक पक्ष पर कोई अवराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ है। दोनों पक्षों को समझाईश दिया गया इस प्रकरण को रायपुर में रखे जाने पर ही शीघ्र निराकरण हो सकेगा। मोहन नगर थाना एवं पुलिस अधीक्षकरू दुर्ग से विसरा रिपोर्ट प्रस्तुत किये जाने हेतु आदेश किया जावेगा। जांच की रिपोर्ट आने के बाद आगामी सुनवाई रायपुर में किया जावेगा। अन्य प्रकरण में थाना देवेन्द्र नगर में टीआई से मिलने का निर्देश आवेदिका को दिया गया था। लेकिन आज 01 साल बाद कंद मिले क्या बात हुई कोई जानकारी प्रस्तुत नहीं किया गया है। आगामी सुनवाई के पूर्व आवेदिका पक्ष लिखित में सभी दस्तावेज आयोग में स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें अन्यथा प्रकरण देवेन्द्र नगर पुलिस रायपुर को प्रतिवेदन के लिए दिया जावेगा। आज की सुनवाई में 03 प्रकरण रायपुर हेतु स्थानांतरित 07 प्रकरण नस्तीबद्ध 01 महिला संरक्षण अधिकारी को जांच हेतु एवं 02 प्रकरण में अनुपस्थित।

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