पांच मंजिल की इस इमारत के आगे के आधे हिस्से में सीढ़ियों बनी हैं, जबकि दूसरे हिस्से में घर बना हुआ है. मकान का आधा हिस्सा जो करीब 20 फीट लंबाई और 5 फीट चौड़ाई वाला है, उसमें एक कमरे का फ्लैट बनाया गया है जिसमें शौचालय से लेकर किचन तक मौजूद है. किचन और शौचालय का आकार ढाई गुना बनाम साढ़े तीन फुट है. कमरे की लंबाई 11 फीट और चौड़ाई 5 फीट है. कुल मिलाकर एक बैचलर के लिए ऊपर के चार फ्लैट तैयार किए गए हैं. जबकि इसके निचले फ्लोर को हॉलनुमा आकार देकर ऊपर जाने के लिए सीढ़ियां बनाई गई हैं.
दरअसल, संतोष और अर्चना ने शादी के बाद 6 फीट चौड़ा और 45 फीट लंबा यह भूखंड खरीदा था. लेकिन जमीन की चौड़ाई महज 6 फीट रहने के कारण कई वर्षों तक उन्होंने इसपर कोई निर्माण नहीं करवाया. लोगों ने उन्हें जमीन बेचने की भी सलाह दी, लेकिन शादी की यादगार वाली इस भूखंड पर दोनों ने मकान बनाने की ठानी और खुद मकान का नक्शा लेकर निगम के इंजीनियर के पास गए और नक्शा पास करवाया. वर्ष 2012 में नक्शा पास होने के बाद 2015 में यह भवन बनकर तैयार हुआ. मकान बनने पर लोग इसे मुजफ्फरपुर का एफिल टावर तो कई लोग इसे अजूबा घर कहने लगे. वर्ष 2012 में नक्शा पास होने के बाद 2015 में यह भवन बनकर तैयार हुआ. मकान बनने पर लोग इसे मुजफ्फरपुर का एफिल टावर तो कई लोग इसे अजूबा घर कहने लगे.
यहां यह बता दें कि वर्ष 2014 के नये बिल्डिंग बायलॉज से पहले इस भवन का नक्शा पास हुआ था. यही वजह है कि जितनी जमीन थी उस पर मकान बनना संभव हो गया. इमारत में खिड़की बाहर खुलने की भी जगह नहीं छूटी है.
मुख्य सड़क से मकान बिल्कुल अपने आकार में साफ-साफ दिखाई पड़ता है. इसकी वजह है कि मकान के अगल-बगल कोई बड़ा भवन नहीं है. अपनी बनावट से खास. बन चुके इस अजूबे भवन को देखने और समझने के लिए रोजाना लोग आ रहे हैं.



















