Author: NEWSDESK

मन में विश्वास और कुछ करने का जुनून हो तो कोई भी आपको सफलता पाने से नहीं रोक सकता, यही कर दिखाया ग्राम राबो की महिलाओं की एकजुटता ने। जिन्होंने कुछ साहस दिखाया और स्व-सहायता समूह का हिस्सा बनने के लिए सामाजिक भय को दूर किया। सबसे पहले केवल तीन स्व-सहायता समूह थे जो बचत ऋण गतिविधि के कारण बहुत अधिक कार्यात्मक नहीं हैं। समय के साथ अधिकांश महिलाओं ने स्व-सहायता समूह की बैठकों में भाग लेना भी बंद कर दिया। लेकिन कुछ महिलाओं ने अपनी आशा नहीं खोई और कड़ी मेहनत की, उन्होंने एसएचजी में और अधिक महिलाओं को लाने के लिए सृजन महिला संघ तमनार और प्रदान, बिहान के कर्मचारी से कुछ मदद मिली और आखिरकार उन्हें सफलता मिली। राबो गांव की सभी महिलाओं को 9 एसएचजी बनाने के लिए एक साथ लाने में सक्षम थे। उसके बाद उन्होंने सभी 9 एसएचजी सहित जय सियाराम ग्राम संगठन नाम से एक ग्राम स्तरीय संगठन बनाया है और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने और एसएचजी को आजीविका से जोडऩे के लिए महीने में एक बार बैठना शुरू कर दिया है।समय बीतने के साथ जय सियाराम ग्राम संगठन के सदस्यों ने विश्वास हासिल किया और लगभग 90 से अधिक महिलाओंं के समर्थन के साथ, पंचायत स्तर की बैठकों में अपने मुद्दों को उठाना शुरू कर दिया और पीआरआई सदस्यों ने भी उनका समर्थन किया। उन्होंने मिलकर गोठान में वर्मी कम्पोस्ट उत्पादक के रूप में काम करना शुरू किया जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा। इस योजना ने न केवल उन्हें सक्रिय बनाया बल्कि उनके ग्राम संगठन को मजबूत करने में भी मदद की। अब तक सभी 9 एसएचजी पंचायत, गोठान समिति, आरईएओ सविता भारती की मदद से वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन कर रहे हैं, जिन्होंने एसएचजी सदस्यों के साथ भी बहुत मेहनत की है और उन्होंने मूल रूप से 23 हजार रुपये का लाभ कमाया है। राशि तो कम थी लेकिन इससे उनका हौसला और बढ़ा, कोई सोच भी नहीं सकता कि वे वर्मी उत्पाद के अपने पहले बैच को बेचकर कितने खुश थे। एसएचजी सदस्यों की रुचि और मेहनत को देखकर पंचायत व अन्य विभाग उनकी मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।कलेक्टर श्री भीम सिंह जब राबो गोठान आये और उनकी मेहनत को देखकर बहुत खुश हुए। उन्होंने अन्य गतिविधियों जैसे सिलाई, कढ़ाई, झाडू बनाना, बांस की वस्तुएं आदि उत्पादों से भी जुडऩे की बात कही। चूंकि गोठान को मॉडल गोठान के रूप में भी चुना गया था, जय सियाराम ग्राम संगठन की अत्यधिक प्रेरित महिलाओं ने गोठान को एक बहु गतिविधि केंद्र बनाने के लिए अन्य गतिविधियों की तलाश करने का फैसला किया। उन्होंने ग्राम संगठन में साबुन, डिटर्जेंट और फिनाइल बनाने, मोमबत्ती उत्पादन इकाई, अगरबत्ती उत्पादन इकाई, मशरूम उत्पादन इकाई, सिलाई कढ़ाई केन्द्र, सब्जियों के लिए नर्सरी इकाई, गेंदा फूल की खेती, ग्राफ्टिंग कार्य, मछली पालन जैसी गतिविधियाँ शुरू करने का निर्णय लिया है। सफलता की ओर पहला कदम बढ़ाते हुए उन्होंने प्रिंटिंग प्रेस के लिए एक प्रस्ताव तैयार किया और कलेक्टर के सामने प्रस्तुत किया। जिससे उन्हें सकारात्मक प्रतिक्रिया भी मिली।

भगवान विष्णु हर साल चार माह तक विश्राम करते हैं। इस समय को चातुर्मास भी कहा जाता है। भगवान विष्णु आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की…

बीजापुर। राज्य शासन की महत्वाकांक्षी सुराजी गांव योजना नरवा-गरवा, घुरवा एवं बाड़ी के तहत जिले में नरवा विकास कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे भू-संरक्षण एवं जलसंवर्धन को बढ़ावा मिला है। इसी कड़ी में बीजापुर सामान्य वनमंडल अंतर्गत मद्देड़ वन परिक्षेत्र में कैम्पा मद से तुनकीवागु नाला का नरवा विकास हेतु चयन कर उपचार कार्य किया गया है। जिसके तहत करीब 1212 हेक्टेयर कैचमेंट एरिया में भू-संरक्षण और जलसंवर्धन संरचनाओं को बनाया गया है। जिसमें तुनकीवागु नाला पर 15 गेबियन स्ट्रक्चर सहित पूरे क्षेत्र मे स्ट्रेगर्ड कन्टूर ट्रेन्च, बोल्डर चेक डेम, लूज बोल्डर चेक डेम सहित कन्टूर स्टोन बंड एवं चेक डेम निर्मित किये गये हैं। इन सभी भू-संरक्षण एवं जल संवर्धन संरचनाओं से वनाच्छादित ईलाके में जहां पानी रूकने के फलस्वरूप वॉटर रिचार्ज से भू-जल स्तर में वृद्धि होगी। वहीं भूमि कटाव के रूकने से भू-संरक्षण सुनिश्चित होगी। अब इस क्षेत्र में निर्मित सभी एसीटी अर्थात स्ट्रेगर्ड कन्टूर ट्रेन्च में काली मूसली रोपित किये गये हैं। इसके साथ ही स्ट्रेगर्ड कन्टूर ट्रेन्च में लेमनग्रास लगाये जायेंगे। वहीं हर दो स्ट्रेगर्ड  कन्टूर ट्रेन्च के बीच में सीताफल के पौधे रोपित किये जायेंगे। जिससे भू-संरक्षण को और अधिक बढ़ावा मिलेगा। नरवा विकास के बारे में डीएफओ श्री अशोक पटेल ने बताया कि शासन की मंशानुरूप भू-संरक्षण एवं जलसंवर्धन को बढ़ावा देने वन क्षेत्र में स्थित नालों का उपचार कार्य किया जा रहा है। इस ओर स्थानीय ग्रामीणों में जागरूकता लाकर उनकी सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है। उन्होने बताया कि नाले में गेबियन संरचना से बारिश का पर्याप्त पानी रूक जाता है और भू-क्षरण नहीं होता है। यह वाटर रिचार्ज का अच्छा विकल्प है, जिससे ग्राउण्ड वॉटर लेबल में आशातीत वृद्धि होगी। इसी तरह स्ट्रेगर्ड कन्टूर ट्रेन्च, बोल्डर चेकडेम, लूज बोल्डर चेक डेम, कन्टूर स्टोन बंड, चेक डेम से भूमि कटाव को रोकने सहित वाटर रिचार्ज को बढ़ावा मिलता है। उन्होने स्ट्रेगर्ड कन्टूर ट्रेन्च में लेमनग्रास रोपित कार्य के जरिये स्थानीय ग्रामीणों को अतिरिक्त आय से जोड़ने पर बल देते हुए बताया कि लेमनग्रास की खरीदी लघु वनोपज संघ के माध्यम से की जायेगी। तुनकीवागु नरवा विकास कार्य से इस वनाच्छादित ईलाके में सकारात्मक परिणाम दिखायी देने लगा है। इस बारे में क्षेत्र के पावरेल एवं कोंगूपल्ली के निवासी पवन दुब्बा, बिचेम यालम, चापा लक्ष्मैया, चापा कन्हैया, गोटे राजाराम, एंजा कृष्णा, मिच्चा समैया आदि ग्रामीणों ने बताया कि विभिन्न संरचनाओं के निर्माण से अब भूमि कटाव रूका है और बारिश का पानी इन संरचनाओं में ठहरने से भू-जल स्तर में सुधार होने की संभावना है। वन विभाग के मैदानी अधिकारी रेंज आफिसर श्री सच्चिदानंद यादव और परिक्षेत्र सहायक श्री नक्का सुरेश ने बताया कि उक्त नरवा विकास कार्य को पूरी तरह तकनीकी मापदण्डों के अनुरूप करने के फलस्वरूप अब देख-रेख एवं रख-रखाव पर अधिक ध्यान दी जा रही है। जिससे आगामी दिनों में बेहतर परिणाम मिलेगा।

बीजापुर। यह कहानी हिरोंदी बाई कश्यप पति स्वर्गीय बनवाली कश्यप बीजापुर नगरीय क्षेत्रान्तर्गत वार्ड क्रमांक 10 में निवास करने वाली की है।वह सड़क किनारे एक छोटी से जगह पर सब्जी की दुकान लगाती है और पिछले 25 साल से वो बीजापुर में निवासरत् है। पति के गुजर जाने के बाद वे एक जवान बेटे पर दो वक्त की रोटी के लिए आश्रित थी परन्तु बेटे के द्वारा भी कोई आर्थिक सहयोग नहीं मिल पाता था। इसके उपरान्त वह एक छोटे से कच्चे मकान पर निवासरत् थी जिसमें पहले छत से पानी टपकने एवं बरसात में अन्य प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। कई वर्षों तक इन परेशानियों का सामना करना पड़ा। प्रधानमंत्री आवास योजना में बीएलसी घटक में ‘‘मोर जमीन मोर मकान’’ के अंतर्गत नये मकान की जानकारी नगरपालिका बीजापुर के अधिकारियों एवं प्रधानमंत्री आवास योजना के टीम के द्वारा उनको प्राप्त हुई। जिसके उपरान्त उनका आवेदन पत्र भरवाकर शासन को प्रस्ताव भेजा गया।जब मकान की स्वीकृति प्रदान हुई तो वे नगरपालिका परिषद बीजापुर में आवास बनवाने के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों से मिली एवं लेबर, मिस्त्री की अनुपलब्धता के कारण आवास निर्माण प्रारंभ नही कर पाने की असमर्थता व्यक्त की। जिसके उपरान्त नगरपालिका की प्रधानमंत्री आवास योजना की टीम द्वारा उन्हे नगर के एक स्थानीय मिस्त्री उपलब्ध कराया गया इस राजमिस्त्री के सहयोग और स्वयं की सहभागिता के फलस्वरूप उन्होने अपना मकान धीरे-धीरे करके पूर्ण किया। हिदोंरी बाई बताती हैं कि वे सपने में भी कभी स्वयं के पक्के मकान की कल्पना नहीं की थी। अब वे अपने पक्के आवास में गर्व एवं खुशी से निवासरत् हैं और छोटी सी सब्जी के व्यवसाय को संचालित कर रही हैं। जिसकी कृतज्ञता वे राज्य शासन के साथ ही नगरपालिका परिषद के प्रति व्यक्त करती हैं।  

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य के कवर्धा जिले में हुए सड़क हादसे में नायब तहसीलदार समेत तीन लोगों की मौत हो गई। हादसे में एक अन्य की घायल…

 रायपुर। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और छत्तीसगढ़ में किसान सत्याग्रह के प्रणेता बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव की 18 जुलाई को पुण्यतिथि पर उन्हें…

राजनांदगांव। शासकीय कमला देवी राठी महिला महाविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में विगत दिनों यूजीसी नेट, जेआरएफ पात्रता परीक्षा की तैयारी हेतु एक 15 दिवसीय विशेष…

राजनांदगांव। शासकीय कमला देवी राठी महिला महाविद्यालय राजनांदगांव के वनस्पतिशास्त्र विभाग एवं आईक्यूएसी द्वारा इंस्ट्रूमेंटन विषय पर ऑनलाईन पांच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।…

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