मध्यप्रदेश के खंडवा स्थित ओंकारेश्वर में 18 सितंबर को आदि गुरु शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची प्रतिमा का उद्घाटन किया जाना है. यहां का अद्वैत लोक संग्रहालय भी काफी अनोखा है. यहां के चार शोध केंद्रों में देश की चारों दिशाओं की कला, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा को संरक्षित करने की योजना पर काम चल रहा है.

ओंकारेश्वर धाम में आगामी 18 सितंबर को आदि गुरु शंकराचार्य की विराट प्रतिमा के उद्घाटन के साथ ही अद्वैत लोक संग्रहालय का भी पूजन होगा. ओंकारेश्वर को आचार्य शंकर की ज्ञान स्थली के तौर माना जाता है. यहां बन रहा अद्वैतलोक नामक संग्रहालय नर्मदा और कावेरी नदी के पास ओंकारेश्वर के मांधाता पर्वत पर स्थित है. प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस दिन आचार्य शंकर के बाल रूप की बनी विशाल परंपरा का उद्घाटन करेंगे.

सरकार इस अनोखे अद्वैत लोक को अंतरराष्ट्र्य ज्ञान और शोथ केंद्र के रूप में विकसित कर रही है. इसके निर्माण में सिद्धस्थ और समर्पित कारीगरों का हुनर देखने को मिलेगा. साथ ही भारत की परंपरागत वास्तु का नजारा भी. यहां आने वाले श्रद्धालु और शोधार्थी भारतीय स्थापत्य कला से साक्षात्कार कर सकेंगे.

नागर शैली का अनोखा नजारा – एकात्म धाम की स्थापत्य शैली पुरातात्त्विक शैली से प्रेरित होगी. धाम के मंदिर की वास्तुकला नागर शैली की होगी. इसके अलावा यहां पारंपारिक वास्तुशिल्प तत्त्वों का भी समायोजन किया जाएगा. मसलन यहां स्तंभ और छत्तरियों का उपयोग दिखेगा. साथ ही कुशल कारीगरों द्वारा तैयार की गई ठोस पत्थर की चिनाई भी दिखेगी. कारीगर यहां के स्तंभों, भित्तिचित्रों और मूर्तियों के माध्यम से आचार्य शंकर के जीवन प्रसंगों को चित्रित करेंगे.

अद्वैत लोक में हैं चार शोध केंद्र – अद्वैत लोक को श्रद्धालुओं और शोधार्थी युवाओं के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया है. सरकार यहां शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए चार शोध केंद्र भी स्थापित करने का विचार कर रही है. ये शोध केंद्र आदि गुरु शंकराचार्य जी के चार शिष्यों के नाम पर रखे गए हैं. ये चारों केंद्र अद्वैत वेदान्त आचार्य शंकर अंतरराष्ट्रीय संस्थान के अधीन होंगे.

इन आचार्यों के नाम पर शोध केंद्र – इन चारों शोध केंद्र के नाम होंगे. मसलन अद्वैत वेदान्त आचार्य पद्मपाद केंद्र, आचार्य हस्तमलक अद्वैत विज्ञान केंद्र, आचार्य सुरेश्वर सामाजिक विज्ञान अद्वैत केंद्र और आचार्य तोटक साहित्य अद्वैत केंद्र. इसकी स्थापत्य शिल्पकला में नागर, द्रविड़, उड़िया, मारू गुर्जर, होयसला, उत्तर भारतीय-हिमालयीन और केरल मंदिर स्थापत्य की छटा देखने को मिलेगी.

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