अयोध्या। अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ रामलला, राममंदिर में विराज चुके हैं। रामलला की मूर्ति की आरती की गई। इस दौरान गर्भगृह में पीएम मोदी, मोहन भागवत मौजूद रहे।मुख्य यजमान पीएम मोदी के अलावा अतिथियों ने भी आरती की। रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की जाने के बाद पीएम मोदी ने मंदिर परिसर के मंच से लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा, हमारे प्रभु राम आ गए हैं। सदियों की अभूतपूर्व प्रतीक्षा, त्याग, बलिदान के पश्चात हमारे राम आ गए हैं। यह शुभ अवसर है, कहने के लिए बहुत कुछ है, किंतु कंठ अवरुद्ध हो रहा है। यह क्षण अलौकिक है, यह पल पवित्र पल है, यह माहौल, यह ऊर्जा, यह वातावरण, यह घड़ी अद्भुत है। हम पर प्रभु राम की कृपा है।
उन्होंने कहा, हमारे श्री राम अब टेंट में नहीं रहेंगे। अब वे इस दिव्य मंदिर में रहेंगे। आज से हजार साल बाद भी लोग इस तारीख की चर्चा करेंगे। हम पर श्री राम की कितनी कृपा है जो हम यह पल जी रहे हैं, इसे घटित होते देख रहे हैं। 22 जनवरी, ये कलैंडर पर लिखी तारीख नहीं बल्कि नए कालक्रम का उत्सव है। उमंग और उत्साह बढ़ता जा रहा है। निर्माण कार्य देख हर दिन नया विश्वास पैदा हो रहा है। आज सदियों के धैर्य की धरोहर मिली है। आज हमें श्रीराम का मंदिर मिला है। गुलामी की जंजीरों को तोड़कर राष्ट्र खड़ा हुआ है। आज से हजार साल के बाद भी लोग आज की इस तारीख को याद रखा जाएगा।
यह समय, दिन, दिशाएं सभी दिव्य हैं। राम भक्त हनुमान, माता जानकी, लक्ष्मण, भरत शत्रुघ्न सभी को नमन करता हूं। मै प्रभु श्री राम से क्षमा याचना भी करता हूं कि हमारी तपस्या में कोई कमी रही होगी जो हमारी तपस्या पूरी होने में इतना समय लगा, किंतु आज वो कमी दूर हुई। पूरे भारत वासियों ने लंबे समय तक यह वियोग सहा। ये नए काल चक्र की उर्जा है देश में नए उत्सव का प्रारंभ हुआ हैं। पूरा देश आज दिवाली मना रहा है। गांव गांव में भजन संकीर्तन हो रहे हैं। शाम को राम दीप प्रज्ज्वलित करेंगे। न्यायपालिका के निर्णय से राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ है। अपने 11 दिनों के व्रत अनुष्ठान के दौरान मैंने उन स्थानों का चरण स्पर्श करने का प्रयास किया जहां प्रभु श्री राम के चरण पड़े थे मुझे सागर से सरयू तक यात्रा करने का अवसर मिला। हर जगह राम नाम छाया है। भारत के कण कण में राम विराजे हैं। इससे अच्छा देश को समाहित करने वाला सूत्र और कुछ नहीं हो सकता है।
मुझे देश के अलग अलग हिस्सों में अलग अलग भाषाओं में रामायण सुनने का अवसर मिला है। राम पर्वत से लेकर परंपराओं में सर्वत्र समाए हैं। हर युग में लोगों ने राम को जिया है, अपने तरीकों से राम को अभिव्यक्त किया है। यह राम रस जीवन की तरह निरंतर बहता रहा है। लोग राम रस का आचमन करते रहे हैं। आज देश उन सभी व्यक्तियों को याद कर रहा है जिनके त्याग और बलिदान के परिणामस्वरूप आज का यह अवसर हमे मिला है।
यह क्षण उत्सव के साथ ही भारतीय समाज के परिपक्वता के बोध का भी है। यह क्षण विनय का है। हमारे देश ने इतिहास की इस गांठ को जिस गंभीरता और परिपक्वता से खोला है। यह बताता है कि हमारा भविष्य सौहार्द और समन्वय से युक्त होगा। राम आग नही हैं ऊर्जा है: राम विवाद नहीं राम समाधान हैं। राम वर्तमान नहीं राम अनंतकाल हैं। राम की प्राण प्रतिष्ठा से पूरा विश्व जुड़ा है। इसमें सर्व व्यापकता है। राम लला की प्रतिष्ठा वसुधैव कुटुंबकम् के भाव की भी प्राण प्रतिष्ठा है । यह मंदिर भारत के दर्शन का मंदिर, राम के चेतना का मंदिर है।

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