अबूझमाड़ के घमंडी मुठभेड़ को ग्रामीणों ने फर्जी बताया है। पुलिस-नक्सल मुठभेड़ में कथित रूप से मारे गए चार नक्सलियों के शव को लेने के लिए ग्रामीण 80 किमी पैदल चलकर शुक्रवार को जिला मुख्यालय पहुंचे। ग्रामीणों और परिजनों ने पुलिस के दावे को खारिज करते हुए मुठभेड़ को फर्जी बताया है। परिजनों का आरोप है कि, मारे गए पांच लोगों में चार लोग घमंडी के निवासी हैं। नक्सल संगठन से इनका कोई वास्ता नहीं हैं। गांव में परिवार के साथ रहकर वे खेती-किसानी कर अपना जीविकोपार्जन करते थे। गांव के युवक लाल साय वड्डे ने बताया कि, पुलिस गांव में पहुंची तो चारों ग्रामीण डर की वजह से जंगल की तरफ भाग गए थे। इस दौरान दूसरी तरफ से आ रहे पुलिस के जवानों ने जंगल में उन्हें भागता देख गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। युवक ने बताया कि, मारे गए लोगों के पास किसी भी तरह का हथियार नहीं था। पोस्टमार्टम के बाद शव लेने के लिए दूधमुंहे बच्चों के साथ अस्पताल पहुंची मृत कथित नक्सली की पत्नी ने गोंडी में बात करते हुए बताया कि, जब फोर्स सोमवार को गांव आए थे तब गांव को चारों तरफ से घेर लिया था तब गांव के पुरूष डर की वजह से गांव छोड़कर चले गए थे। दूसरे दिन नक्सली मुठभेड़ में मारे जाने की सूचना दी गई।

ग्रामीणों का आरोप निराधार : एसपी प्रभात कुमार
इस आरोप पर नारायणपुर के एसपी प्रभात कुमार ने बताया कि, माड़ बचाओ अभियान के तहत पांचवी बार सुरक्षाबलों ने कोर इलाकों में अभियान चलाया है। इस दौरान टॉप नक्सली लीडरों को टारगेट किया जा रहा है। नक्सल संगठन के तीसरे और चौथे क्रम के लोगों को अभियान से दूर रखा गया है। मुठभेड़ में अब तक जो मारे गए हैं वह पुलिस के प्रोफाइल में आठ लाख के इनामी नक्सली हैं। हर मुठभेड़ के बाद नक्सल दबाव में ग्रामीण पुलिस पर झूठा आरोप लगाते हैं। घमंडी मुठभेड़ में चालीस लाख के इनामी नक्सली मारे गए हैं। ग्रामीणों ने जो आरोप लगाया है वह निराधार है। उल्लेखनीय है कि, 30 जून को जिला नारायणपुर के थाना कोहकामेटा, सोनपुर, कैम्प ईरकभट्टी, मोहंदी और ढोढरीबेड़ा से डीआरजी,  बीएसएफ,  एसटीएफ और आईटीबीपी की संयुक्त पार्टी सर्चिंग के लिए ग्राम हिकुलनार और घमंडी की तरफ रवाना हुई थी। इस दौरान मंगलवार को पुलिस पार्टी और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ हुई। अब ग्रामीण फोर्स पर फर्जी मुठभेड़ का आरोप लगाकर कह रहे हैं कि, चार निर्दोष ग्रामीणों की हत्या कर दी गई।

इनके परिजनों ने लगाया आरोप
पुलिस प्रोफाइल के मुताबिक मारे गए कथित नक्सली कोंडा तोगड़ा, एडमा वड्डे, कमलू वड्डे और फरसा तमुड़ा पीएलजीए कम्पनी नम्बर 1 सीसी प्रोटेक्शन टीम के मेम्बर थे। इन पर आठ-आठ लाख का ईनाम था। इन चारों लोगों के परिजनों ने पुलिस के दावे को नकारते हुए मुठभेड़ को फर्जी बताया है।

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