वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में बीते दिनों संपन्न हुई जीएसटी काउंसिल की 55वीं बैठक में पॉपकॉर्न पर तीन तरह के जीएसटी का मामला सामने आया, तो देशभर में बवाल मच गया. राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया मीडिया तक पर इसे लेकर बहस शुरू हो गई, जिसके बाद सरकार की ओर से स्पष्टीकरण भी जारी किया गया. लेकिन इसे लेकर अभी भी लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं. आइए जानते हैं इनका जवाब विस्तार से..
पॉपकॉर्न पर 3 तरह के टैक्स
सबसे पहले बताते हैं कि आखिर पूरा मामला है क्या और GST Counsil की राजस्थान के जैसलमेर में हुई 55वीं बैठक में पॉपकॉर्न पर जीएसटी को लेकर क्या फैसला सरकार की ओर से लिया गया है. दरअसल, काउंसिल की बैठक के फैसले सामने आए, तो पता चला कि Popcorn पर फ्लेवर के हिसाब से तीन तरह के टैक्स सरकार की ओर से लगाए गए हैं. इनमें अगर आपके द्वारा खरीदा गया पॉपकॉर्न साधारण नमक और मसालों से तैयार किया गया है और ये पैकेज्ड और लेबल्ड नहीं है, तो फिर इस पर 5% जीएसटी लागू होगा. अगर यही नमक-मसाले वाला पॉपकॉर्न पैकेज्ड और लेबल्ड होता है, तो टैक्स 5% से बढ़कर 12% हो जाएगी. इसके अलावा अगर चीनी यानी Sugar फ्लेवर वाले पॉपकॉर्न होगा, तो ये ‘चीनी कन्फेक्शनरी’ की कैटेगरी में आएगा और इसपर 18% जीएसटी लगेगा.
स्पष्टीकरण के बाद भी पूछे जा रहे सवाल
Popcorn GST पर बहस शुरू होने के बाद सरकार की ओर से इसे लेकर एक स्पष्टीकरण जारी किया गया. इसमें बताया गया कि रेडी-टू-ईट पॉपकॉर्न पर ये टैक्स पहले से ही लागू हैं, जिन्हें जीएसटी काउंसिल द्वारा अब इन्हें ‘जैसा है जहां है’ के आधार पर नियमित करने का निर्णय लिया गया है. काउंसिल के मुताबिक, Popcorn पर किसी तरह का कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है, बल्कि पहले से लागू टैक्स की दरों को स्पष्ट किया गया है. सरकार की ओर से स्पष्टीकरण दिए जाने के बावजूद अब अक्सर कुछ सवाल पूछे जा रहे हैं…
पहला सवाल- क्या पॉपकॉर्न पर GST की दर बढ़ाई गई है?
जबाव: हाल ही में आयोजित जीएसटी परिषद की 55वीं बैठक में पॉपकॉर्न पर जीएसटी दर में कोई वृद्धि नहीं की गई है. उत्तर प्रदेश राज्य से नमक और मसालों के साथ मिश्रित पॉपकॉर्न पर लागू वर्गीकरण और जीएसटी दर को स्पष्ट करने का अनुरोध प्राप्त हुआ था. इस मुद्दे को 55वीं जीएसटी परिषद में ले जाया गया और परिषद ने इसे स्पष्ट करने की सिफारिश की, जिसके बाद GST Council की ओर से पहले से लागू 5%,12% और 18% की दर को स्पष्ट करते हुए नियमित किया गया है.
दूसरा सवाल- पॉपकॉर्न पर अलग-अलग दरों का आधार क्या है?
उत्तर: खाद्य पदार्थों सहित सभी वस्तुओं को हार्मोनाइज्ड सिस्टम (HS) वर्गीकरण के अनुसार जीएसटी के तहत नोटिफाई किया जाता है, जो वर्ल्ड कस्टम्स ऑर्गेनाइजेशन (WCO) द्वारा डेवलप इंटरनेशनल गुड्स नॉमेक्लेचर है. इस सिस्टम का यूज 200 से ज्यादा देशों द्वारा किया जाता है, जो इंटरनेशनल बिजनेस के 98% से अधिक को कवर करता है. इस एचएस वर्गीकरण के अनुसार, चीनी कन्फेक्शनरी चैप्टर 17 में एचएस 1704 के अंतर्गत आती है, कुछ वस्तुओं को छोड़कर सभी चीनी कन्फेक्शनरी पर 18% GST लगता है. भारत में, नमकीन को एचएस 2106 90 99 के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है. नमकीन को प्री-पैकेज्ड और लेबल वाले फॉर्म के अलावा अन्य रूप में बेचे जाने पर 5% जीएसटी लगता है और प्री-पैकेज्ड और लेबल वाले फॉर्म में बेचे जाने पर 12% जीएसटी लगता है.
तीसरा सवाल- सरकार के स्पष्टीकरण देने का उद्देश्य क्या था?
उत्तर: दरअसल, GST काउंसिल की ओर से इसका कारण बताते हुए कहा गया है कि कुछ सेक्टर्स इस पर अलग-अलग टैक्स रेट्स की डिमांड कर रहे थे. ऐसे में किसी भी तरह के विवादों को निपटाने के लिए अब नमक और मसालों के साथ मिश्रित रेडी टू ईट पॉपकॉर्न पर पहले से लागू 5 फीसदी, 12 फीसदी और 18 फीसदी की दरों को स्पष्ट किया गया है.
चौथा सवाल- क्या सिनेमाघरों में पॉपकॉर्न की बिक्री महंगी हो जाएगी?
उत्तर: नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं है, सिनेमाघरों में पॉपकॉर्न आम तौर पर ग्राहकों को अनपैक्ड दिए जाते हैं और सरकार द्वारा इसे लेकर तय की गई कैटेगरी के मुताबिक, इसके ऊपर 5 फीसदी की दर से ही जीएसटी रेट (GST Rates) लागू होंगे. यानी मूवी देखते समय पॉपकॉर्न खाने में आपकी जेब पर कोई एक्स्ट्रा बोझ नहीं पड़ेगा.
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