नई दिल्ली । प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अवैध विदेशी भुगतान के मुकदमों की पहले से जारी एक जांच के दौरान 98 डमी साझेदारी कंपनियों और 12 प्रा लि कंपनियों के नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। ईडी ने पाया कि इस नेटवर्क के जरिये आरोपियों ने भाड़ा भुगतान के नाम पर 10 हजार करोड़ रुपये हांगकांग, सिंगापुर और थाइलैंड की फर्मों को भेजे।

ईडी के मुताबिक, इन लोगों ने धोखाधड़ी के लिए 269 बैंक खातों का इस्तेमाल किया। ये खाते फर्जी कंपनियों के नाम पर खोले गए। एजेंसी ने ठाणे पुलिस में जितेंद्र पांडे व अन्य के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के आधार पर अपनी शुरुआती कार्रवाई की थी। इन लोगों ने इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया है। ठाणे पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई ने पांडे और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। ईडी के मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय ने 2 जनवरी को अवैध विदेशी भुगतान के केस में मुंबई में 11 जगहों पर धनशोधन निवारण कानून (पीएमएलए), 2002 के तहत छापा मारा था। इसके एक सप्ताह बाद एजेंसी ने घोटाले का खुलासा किया है। छापे के दौरान एजेंसी ने नकदी और जेवर के रूप में करीब एक करोड़ रुपये जब्त किए थे।
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अंत में 12 कंपनियों के खाते में आते थे पैसे
ईडी ने बताया कि छापे के दौरान आरटीजीएस इंट्री ऑपरेटरों के एक नेटवर्क का पता चला जो फर्जी कंपनियों के बैंक खातों की ऐसी परत बनाकर 98 साझेदार फर्मों के बैंक खातों में आरटीजीएस की इंट्री करता था जिससे फंड सबसे पहले कहां से आया इसका पता ही नहीं चलता था। इसके बाद, अंत में पैसे को परिवहन लागत और लॉजिस्टिक्स के नाम पर विदेश में हुए भुगतान के नाम पर 12 प्रा. लि. कंपनियों के बैंक खातों में डाल दिया जाता था।

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