छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम राज के अनुसार, राज्य में कुछ माफिया और कारोबारियों ने वक्फ की जमीनों को अवैध रूप से बेच दिया।

वक्फ बोर्ड ने जब सभी जिलों में वक्फ संपत्तियों की जानकारी मंगवाई, तो इस घोटाले का पर्दाफाश हुआ। जांच में पता चला कि कुछ संपत्तियों को हाल ही में और कुछ को 30-40 साल पहले दस्तावेजी गड़बड़ियों के जरिए बेचा गया है। अब बोर्ड इन अवैध रजिस्ट्रियों को शून्य करने की प्रक्रिया शुरू कर चुका है।

500 करोड़ की संपत्ति का अवैध सौदा
बोर्ड ने सभी कलेक्टरों को पत्र जारी कर जानकारी मांगी थी। जांच में सामने आया कि करीब 500 करोड़ से अधिक की वक्फ संपत्ति अवैध रूप से बिकी है। सलीम राज ने बताया कि सभी रजिस्ट्रारों और कलेक्टरों को पत्र भेजकर स्पष्ट किया गया है कि वक्फ प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री हो ही नहीं सकती थी। जगदलपुर, अंबिकापुर, रायपुर और बिलासपुर में वक्फ जमीन की सौदेबाजी उजागर हुई है। डिजिटल नक्शे न होने के बावजूद, फर्जी डिजिटल नक्शे दिखाकर यह सौदेबाजी की गई।

कौन है जिम्मेदार?
इस गड़बड़ी की जिम्मेदारी तय करने के सवाल पर सलीम राज ने कहा, “यह गड़बड़ियां 15-17 साल पुरानी हैं। बीते वर्षों में वक्फ बोर्ड में क्या हुआ, इस पर मैं नहीं जाना चाहता, लेकिन वर्तमान स्थिति के अनुसार, हम सख्त कार्रवाई कर रहे हैं।”

वक्फ संपत्तियों का मूल्यांकन
बोर्ड की हालिया जांच में 1,380 करोड़ 90 लाख रुपए की संपत्ति का दस्तावेजी रिकॉर्ड मिला है। सलीम राज के अनुसार, छत्तीसगढ़ में कुल 5,000 करोड़ की वक्फ संपत्ति मौजूद है।

सबसे अधिक संपत्ति बिलासपुर में
वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड के अनुसार, सबसे अधिक 277 एकड़ संपत्ति बिलासपुर में है। दुर्ग में 24 एकड़, अंबिकापुर में 4 एकड़, और जगदलपुर में बोर्ड की जमीन पर हेलीपैड बनाया गया है, जिसके लिए सरकार से मुआवजे की प्रक्रिया जारी है।

90 फीसदी संपत्ति पर अवैध कब्जा
वर्तमान में वक्फ बोर्ड की 90% संपत्ति पर अवैध कब्जा है। बोर्ड अब दस्तावेजों को पुनः खंगालकर इन संपत्तियों को मुक्त कराने और उनके सही उपयोग की दिशा में कार्य कर रहा है।

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