हाल में करंट बायोलॉजी में प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2004 में आइवरी कोस्ट के ताई नेशनल पार्क में शिकारियों ने जब चिम्पैंज़ियों के एक समूह के अंतिम दो वयस्क नरों में से एक को गोली मार दी थी तो उसके साथ-साथ चिम्पैंज़ियों के उस समूह की ‘बोली’ का एक इशारा (भाव-भंगिमा) भी खत्म हो गया।
वैसे तो कई अध्ययनों से हमें चिम्पैंज़ियों के व्यवहार/औज़ारों के इस्तेमाल वगैरह में विविधता के बारे में काफी कुछ पता चला है। हम यह भी जानते हैं चिम्पैंज़ी समुदाय किस तरह से औज़ारों/साधनों का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन यह अध्ययन पहली बार इस बात के प्रमाण प्रस्तुत करता है कि चिम्पैंज़ियों के अलग-अलग समूह एक ही चाहत या संवाद के लिए अलग-अलग हाव-भाव का इस्तेमाल करते हैं और मनुष्यों के हस्तक्षेप या गतिविधियों के कारण उनके समूह के ये विशिष्ट व्यवहार विलुप्त हो रहे हैं।
दरअसल नर चिम्पैंज़ी जब मादा के लिए अन्य नरों के साथ होने वाले टकराव और लड़ाई को टालना चाहते हैं तो वे गुपचुप संभोग के लिए मादा को चुपके से इशारा करते हैं। ये इशारे आम तौर पर संभोग आमंत्रण के लिए दिए जाने वाले इशारों से अलग होते हैं। ये इशारे इतने चुपके से किए जाते हैं कि बस पास मौजूद मादा का ही इन पर ध्यान जाए, अन्य नरों का नहीं।
स्विस सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च के संरक्षण जीवविज्ञानी चिम्पैंज़ियों के इन्हीं इशारों और उनके मायनों में विविधता का अध्ययन कर रहे थे। इसके लिए उन्होंने ताई जंगल में रहने वाले चार चिम्पैंज़ी समुदायों के 495 इशारों का अध्ययन किया और पाया कि एक ही बात के लिए प्रत्येक समूह के इशारों में अंतर होता है, हालांकि कुछ इशारे एक समान भी होते हैं। जैसे संभोग के लिए आग्रह करने के लिए चारों समुदायों के नर किसी एक डाली को आगे-पीछे हिलाते हैं या अपनी एड़ी को ज़मीन पर पटकते हैं। लेकिन सिर्फ दक्षिणी और पूर्वी समुदाय के चिम्पैंज़ी चुपके से संभोग के इशारे के लिए पत्तियों को चीरते हैं, और केवल पूर्वोत्तर समुदाय के चिम्पैंज़ी उंगलियों के जोड़ से पेड़ या किसी सख्त सतह को ठोंकते हैं जैसे हम दरवाज़े को खटखटाते हैं। इस इशारे को नकल नॉक (knuckle knock) कहते हैं। वहीं हज़ारों किलोमीटर दूर युगांडा के चिम्पैंज़ी इनमें से किसी इशारे का इस्तेमाल नहीं करते बल्कि वे अपने दोनों हाथों से किसी वस्तु पर तबला जैसे बजाते हैं, और यह इशारा आइवरी कोस्ट के चिम्पैंज़ियों में नहीं देखा गया था।
जब शोधकर्ता इन इशारों का अध्ययन कर रहे थे तब दल की फील्ड असिस्टेंट होनोरा नेने कपाज़ी का ध्यान चिम्पैंज़ियों के पूर्वोत्तर समूह द्वारा किए जाने वाले एक इशारे की ओर गया। उनके ध्यान में यह बात पिछले 30 से अधिक वर्षों से चिम्पैंज़ियों के साथ किए गए उनके काम के अनुभव के चलते आई। कपाज़ी ने पाया कि चिम्पैंज़ियों के पूर्वोत्तर क्षेत्र के समूह द्वारा किए गए इस knuckle knock इशारे का उपयोग उत्तरी क्षेत्र के समुदायों में भी काफी आम हुआ करता था, लेकिन यह इशारा अब वहां से नदारद है।

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