राजस्थान की प्रख्यात कांग्रेस नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और समाजसेवी डॉ. गिरिजा व्यास का गुरुवार को 79 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह 31 मार्च को उदयपुर स्थित अपने निवास पर गणगौर पूजा के दौरान आग से झुलस गई थीं, जिसमें वे 90 प्रत‍िशत तक झुलस गई थीं। इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से कांग्रेस पार्टी समेत पूरे राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड गई।

डॉ. व्यास शिक्षा, साहित्य, समाज सेवा और राजनीति के क्षेत्र में एक सशक्त और संवेदनशील आवाज रही हैं। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की वरिष्ठ नेता थीं और केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुकी थीं।

कांग्रेस पार्टी ने अपने शोक संदेश में कहा, डॉ. गिरिजा व्यास का निधन भारतीय राजनीति में एक अपूरणीय क्षति है। देश की राजनीति के साथ ही शिक्षा एवं समाज सेवा में उनका अभूतपूर्व योगदान रहा है।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस नेता डॉ. गिरिजा व्यास के दुखद निधन की खबर सुनकर स्तब्ध हूं। युवा कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में उनके चुनावों में काम करने की यादें मेरे मन में हैं। उनकी कविता और उनकी राजनीति हमेशा पुरानी दुनिया के आकर्षण के लिए याद की जाएगी।

राजस्थान कांग्रेस ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा, डॉ. गिरिजा व्यास का इस तरह असमय जाना कांग्रेस के लिए बड़ा आघात है। उनका योगदान शिक्षा, राजनीति और समाजसेवा के क्षेत्र में सदैव याद रखा जाएगा।

कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने भावुक होते हुए कहा, गिरिजा व्यास जी का निधन मेरे और मेरे परिवार के लिए व्यक्तिगत क्षति है। लगभग 25 वर्ष पूर्व कांग्रेस पार्टी की औपचारिक सदस्यता मुझे उनके हस्ताक्षर से मिली थी। उनका स्नेह और मार्गदर्शन सदैव प्रेरणा देता रहेगा।

राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद डोटासरा ने कहा कि गिरिजा व्यास का निधन कांग्रेस परिवार की अपूरणीय क्षति है। उन्होंने प्रदेश की प्रगति और महिलाओं के अधिकारों के लिए अमूल्य योगदान दिया।

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के नेता हनुमान बेनीवाल ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, गिरिजा जी न केवल प्रखर वक्ता और कुशल प्रशासक थीं, बल्कि उन्होंने महिलाओं और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर अविस्मरणीय कार्य किया। राजस्थान ने एक समर्पित नेता खो दिया।

एक युवा कार्यकर्ता के रूप में उनके साथ काम करने की याद साझा करते हुए एक नेता ने सोशल मीडिया पर लिखा, उनकी कविता और राजनीति में एक पुरानी दुनिया का आकर्षण था, जो अब स्मृतियों में ही रहेगा।

उल्लेखनीय है कि डॉ. गिरिजा व्यास का निधन सिर्फ एक राजनीतिक शख्सियत के जाने की खबर नहीं है, बल्कि एक साहित्यप्रेमी, शिक्षाविद और समाजसेविका के अवसान की पीड़ा है। उनका जाना एक युग का अंत है।

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