प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक एवं पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित डॉ. सुब्बान्ना अय्यप्पन यहां साईं आश्रम के पास कावेरी नदी में रहस्यमयी परिस्थितियों में मृत पाए गए। पुलिस ने यह जानकारी दी है। गौरतलब है कि डॉ. अय्यप्पन सात मई से लापता थे। पुलिस के अनुसार शनिवार शाम को कावेरी नदी में रहस्यमय परिस्थितियों में मृत पाए गए। मैसूर के विश्वेश्वर नगर औद्योगिक क्षेत्र के निवासी 70 वर्षीय डॉ. अय्यप्पन को आखिरी बार पिछले सप्ताह की शुरुआत में अपने घर से निकलते देखा गया था।

पुलिस के अनुसार, उनका स्कूटर नदी के किनारे पर लावारिस हालत में मिला, जिसके बाद तलाशी अभियान चलाया गया। पुलिस को नदी में एक अज्ञात शव की मौजूदगी की सूचना मिली और जांच में पुष्टि हुई कि यह डॉ. अय्यप्पन का ही शव है। उनके परिवार में उनकी पत्नी और पुत्रियां हैं। इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है और मौत के कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है।

डॉ. सुब्बाना अय्यप्पन का जन्म 10 दिसंबर, 1955 को कर्नाटक के येलंदूर में हुआ था। वह एक अग्रणी मत्स्य वैज्ञानिक थे और उन्हें भारत की ‘नीली क्रांति’ के प्रमुख वास्तुकार के रूप में जाना जाता है। कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय, बेंगलुरु से मत्स्य विज्ञान में डिग्री और पीएचडी प्राप्त करने के बाद उन्होंने परिवर्तनकारी जलीय कृषि प्रथाओं की शुरुआत की, जिससे खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका में वृद्धि हुई।

उन्होंने केंद्रीय मीठे पानी जलकृषि संस्थान (सीआईएफए) और केंद्रीय मत्स्य शिक्षा संस्थान (सीआईएफई) के निदेशक, राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी) के संस्थापक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव सहित प्रमुख भूमिकाएँ निभाईं।

वर्ष 2022 में पद्म श्री से सम्मानित, उन्होंने बाद में केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (सीएयू) , इंफाल के कुलपति के रूप में कार्य किया और परीक्षण और अंशांकन प्रयोगशालाओं के लिए राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) की अध्यक्षता करते हुए विज्ञान और कृषि में अपना योगदान जारी रखा।

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