विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन ही प्रदेश में खाद-बीज संकट को लेकर जमकर हंगामा हुआ। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने शून्यकाल में राज्यभर में किसानों को खाद की भारी किल्लत का मुद्दा उठाया और इस पर स्थगन प्रस्ताव के जरिए चर्चा की मांग की।

डॉ. महंत ने कहा, “प्रदेश का किसान परेशान और आक्रोशित है। सरकार की नाकामी के कारण खाद की भारी कमी है, इस पर तत्काल चर्चा होनी चाहिए।” उनके इस प्रस्ताव का समर्थन पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने भी किया। बघेल ने कहा कि किसान दोगुनी कीमत पर खुले बाजार से खाद खरीदने को मजबूर हैं। उमेश पटेल ने DAP खाद की कमी को गंभीर चिंता का विषय बताया।

कृषि मंत्री का जवाब और आसंदी का फैसला
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने इस मुद्दे पर सदन में अपना वक्तव्य दिया। लेकिन वक्तव्य के बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि मंत्री के जवाब से वह संतुष्ट हैं और इसलिए विपक्ष का स्थगन प्रस्ताव नामंजूर किया जाता है।

इस फैसले से नाराज कांग्रेस विधायकों ने गर्भगृह तक पहुंचकर नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्षी विधायकों ने सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाया और विधानसभा में जमकर विरोध जताया। गर्भगृह में प्रदर्शन के चलते कई कांग्रेस विधायकों को निलंबित कर दिया गया।

गांधी प्रतिमा के सामने धरना
विधानसभा से बाहर आने के बाद कांग्रेस विधायकों ने गांधी प्रतिमा के सामने धरना देकर विरोध प्रदर्शन किया। विधायकों ने सरकार पर किसानों की आवाज दबाने और गंभीर मुद्दों से भागने का आरोप लगाया। “किसान विरोधी सरकार” के नारे लगाते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक किसानों को खाद-बीज की सुविधा नहीं मिलती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।

विधानसभा के पहले दिन ही गरमाई सियासत ने साफ कर दिया है कि मानसून सत्र में किसान, खाद और कृषि संकट प्रमुख मुद्दा बने रहेंगे।

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