राजस्थान के जैसलमेर में एक सूखी झील से डायनासोर के जीवाश्म जैसी निशानियां मिली हैं. झील की सफाई और खुदाई के दौरान ये कंकाल की हड्डियां और पत्थर बन चुके अनोखे जीवाश्म मिले. माना जा रहा है कि ये डायनासोर युग से संबंधित हो सकते हैं. अगर ऐसा हुआ तो जैसलमेर में डायनासोर जीवाश्म की यह पांचवीं खोज होगी.

झील की खुदाई के दौरान दिखे कंकाल

जैसलमेर जिले में फतेहगढ़ क्षेत्र के मेघा गांव में बुधवार को झील की सफाई और गहरी खुदाई के दौरान ग्रामीणों को हड्डियों और पत्थरों के अवशेष मिले. गांव के निवासी श्याम सिंह ने सबसे पहले इन अवशेषों को देखा. प्रशासन और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को जानकारी दी गई. 

श्याम सिंह ने बताया कि झील में हमें कंकाल जैसी संरचना और पत्थरों पर छाप दिखाई दी. मुझे लगा कि यह प्राचीन जीवाश्म हो सकते हैं. मैंने तुरंत प्रशासन और एएसआई को सूचना दी. एसडीएम मौके पर आए और सर्वे किया. उन्होंने कहा कि ये कंकाल जैसी संरचना डायनासोर या किसी अन्य जीव की रीढ़ की हड्डी जैसी लगती है.

पुरातत्व विभाग की टीम जांच करने पहुंचीं

एक अन्य ग्रामीण राम सिंह भाटी ने बताया कि गांव वाले झील की सफाई और खुदाई कर रहे थे, तभी उन्हें लंबे आकार का कंकाल और जीवाश्म मिले. देखने में यह डायनासोर के अवशेष और पत्थर जैसे लगे. हमने तस्वीरें खींचकर जिला प्रशासन और पुरातत्व विभाग को भेजीं, जिसके बाद टीम यहां सर्वे के लिए पहुंची.

पंख जैसे अवशेष लग रहेः भूवैज्ञानिक

स्थानीय भूवैज्ञानिक नारायण दास इंखिया ने जगह का दौरा करने के बाद कहा कि बहुत संभव है कि यह डायनासोर के जीवाश्म हों. इनका आकार मध्यम है और यहां पंख जैसे अवशेष भी दिख रहे हैं. हालांकि वैज्ञानिक पुष्टि तभी होगी, जब जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) की टीम अध्ययन करेगी. उन्होंने बताया कि जैसलमेर की चट्टानें लगभग 18 करोड़ साल पुरानी हैं. जुरासिक काल में यह इलाका डायनासोर के अस्तित्व का हिस्सा रहा होगा.

जैसलमेर में मिले हैं डायनासोर के जीवाश्म 

जैसलमेर में पहले भी डायनासोर के जीवाश्म मिल चुके हैं. पहली बार थियात गांव में हड्डियों के जीवाश्म मिले थे. उसके बाद डायनासोर के पदचिह्न खोजे गए थे. 2023 में डायनासोर का अंडा भी सुरक्षित स्थिति में मिला था. अगर मेघा गांव में मिले ये अवशेष डायनासोर के साबित होते हैं तो यह जैसलमेर की ऐसी 5वीं खोज होगी.

फिलहाल झील क्षेत्र को जिला प्रशासन ने सील कर दिया है. वैज्ञानिकों की टीम के आने तक सुरक्षा व्यवस्था की गई है. टीम के अध्ययन के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह अवशेष वास्तव में डायनासोर के हैं या नहीं. और अगर हैं तो किस प्रकार के डायनासोर के हैं.

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