राजनांदगांव। पांचवें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के अवसर पर मनकी स्थित छत्तीसगढ़ आयुर्वेद मेडिकल कालेज एवं आरोग्य भारती राजनांदगांव के द्वारा त्रि-दिवसीय विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम की शुरूआत में पहले दिन फेसबुक व गूगल मीट पर वेबिनार का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता नागपुर शासकीय आयुर्वेद कालेज की स्वस्थवृत्त एवं योग विभाग की अध्यक्ष डा. सुमीता जैन ने आयुर्वेद के महत्व बताए। वेबिनार में डा. सुमीता जैन ने कोविड-19 महामारी के प्रबंधन में आयुर्वेद की संभावित भूमिका का उल्लेख करते हुए इम्पैक्ट ऑफ बायोलाजिकल क्लाक आन लाइफ स्टाइल डिजीज पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया, धरती के सारे जीवधारियों के शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी बिल्कुल एक ही पैटर्न पर काम करती है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज के भारतीय मूल के युवा वैज्ञानिक अभिषेक रेड्डी ने पता लगाया है कि किसी भी जीवधारी की कोशिकाओं को 24 घंटे संचालित करने वाली घड़ी का मैकेनिज्म एक-सा रहता है। जिन लोगों की नियमित दिनचर्या नहीं होती, उनकी जैविक घड़ी का मैकेनिज्म बिगड़ जाता है। इस रिसर्च से मालूम हुआ है कि मनुष्यों की दिनचर्या हजारों सालों से एक जैसी है और उसका कारण उसके भीतर संचालित हो रही जैविक घड़ी है। जैविक घड़ी से व्यक्ति के सोचने, समझने की दशा एवं दिशा, तर्क-वितर्क, निर्णय क्षमता एवं व्यवहार पर प्रभाव पड़ता है। कई दिनों से न सो पाए या अनियमित दिनचर्या वाले व्यक्ति, चिड़चिड़े स्वभाव के हो जाते हैं। किसी बात को तत्काल याद नहीं कर पाते तथा किसी बात पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते। डा. जैन ने बताया कि, शोधानुसार औसतन हम 1 मिनट में 15 से 18 बार सांस लेते हैं तथा हमारा हृदय 72 बार धड़कता है। यदि यह औसत गड़बड़ाता है तो शरीर रोगी होने लगता है। ऐसे में कोरोना संक्रमण के दौर में इससे बचाव तथा अच्छी सेहत के लिए हमें और भी ज्यादा सजग रहने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस कार्यक्रम के क्रम में दूसरे दिन पौधारोपण किया गया। कार्यक्रम के संबंध में छत्तीसगढ़ आयुर्वेद मेडिकल कालेज मनकी, राजनांदगांव की प्राचार्य डा. वर्षा वंजारी ने बताया, आयुर्वेद दिवस कार्यक्रम के तृतीय व अंतिम दिन श्री धन्वंतरि जी का पूजन कार्यक्रम होगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजनांदगांव महापौर हेमा देशमुख एवं पूर्व सांसद व महापौर मधुसूदन यादव होंगे। उन्होंने बताया, आयुर्वेद दिवस का आयोजन इस वर्ष कोविड-19 महामारी के प्रबंधन में आयुर्वेद की संभावित भूमिका पर केंद्रित है। ऐसे में सही समय पर भोजन, करे इम्युनिटी का रक्षण…जैसे नारे का पालन हर किसी को करना चाहिए। उन्होंने बताया, सन् 2016 से प्रति वर्ष धन्वंतरि जयंती के दिन आयुर्वेद दिवस मनाया जा रहा है। आयुर्वेद दिवस मनाने का उद्देश्य आयुर्वेद और उसके अद्वितीय उपचार सिद्धांतों की शक्तियों पर ध्यान केंद्रित करना है। आयुर्वेद की क्षमता का उपयोग करके रोग और संबंधित मृत्यु दर को कम करने की दिशा में काम करना, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम और राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में योगदान के लिए आयुर्वेद की क्षमता का उपयोग करने के साथ-साथ समाज में चिकित्सा के लिए आयुर्वेदिक सिद्धांतों को बढावा देना भी इसके उद्देश्यों में शामिल है। इस प्रकार आयुर्वेद दिवस, उत्सव और समारोह से अधिक समाज के लिए समर्पण का अवसर है।

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