भारत और अमेरिका ने शुक्रवार को 10 वर्षीय रक्षा रूपरेखा समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसे दोनों देशो के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक माना जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके अमेरिकी समकक्ष पीट हेगसेथ ने यह समझौता कुआलालंपुर में अपने द्विपक्षीय वार्ता के दौरान किया। रक्षा मंत्री 12वें आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (एडीएमएम-प्लस) में हिस्सा लेने के लिए कुआलालंपुर पहुंचे थे।
राजनाथ सिंह ने इस समझौते को ‘रक्षा साझेदारी’ के नए युग की शुरूआत बताया और कहा कि यह ढांचा दोनों के रक्षा संबंधो को और मजबूत दिशा देगा। उन्होंने कहा, ‘यह समझौता हमारे रणनीतिक अभिसरण का संकेत है और आने वाले दशक में सहयोग का नया अध्याय खोलेगा।’
अमेरिकी रक्षा मंत्री हेगसेथ ने कहा कि यह समझौता क्षेत्रीय स्थिरता और निवारण का आधार बनेगा। उन्होंने कहा कि हम अपने समन्वय, सूचना-साझाकरण और तकनीकी सहयोग को और गहरा कर रहे है। भारत के साथ हमारे रक्षा संबंध अब तक के सबसे मजबूत स्तर पर है।
यह नई रूपरेखा 2015 में हुए पूर्ववर्ती समझौते की जगह लेगी, जिसकी अवधि अब समाप्त हो रही थी। इसमें रक्षा उद्योग, तकनीकी सहयोग और आपसी साझेदारी को दीर्घकालिक नीती दिशा देने का प्रावधान है। वार्ता में दोनों पक्षो ने हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड और अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस के बीच एफ 414 जेट इंजन के संयुक्त उत्पादन पर भी चर्चा की। दोनों नेताओ ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र को ‘मुक्त, खुला और नियम-आधारित’ बनाए रखने की दोनों देशों के बीच प्रतिबद्धता दोहराई।
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