रायपुर। कोरोना संक्रमण के संबंध में डाक्टर अनेक सलाह देते हंै जिसे अगर अमल में लाया जाए तो इस बीमारी के घातक परिणामों से बचा जा सकता है । डॉक्टर बार-बार कहते हैं कि दवाई दुकान से खुद से दवाईयां खरीद कर नही खाना चाहिए या परिजन को जो दवाईयां दी जा रहीं संक्रमण के लिए, उसी को बिना डॉक्टर से पूछे नही खाना चाहिए। जागरूकता के अभाव में, लापरवाही के कारण मृत्यु अधिक हो रही है। संक्रमित मरीज या उसके परिजन भी यदि जागरूक हों तो कई जिंदगियां बच सकती हैं। डेथ आडिट में यह बात सामने आई कि रायगढ़ जिले के एक 40 वर्ष के पुरूष को 24 अक्टूबर से लक्षण दिखाई दे रहे थे। उसने 26 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक दवाई दुकान से दवाई खरीद कर खाई। 31 अक्टूबर को टेस्ट कराया, पाजिटिव आने पर पहले कोविड केयर केन्द्र भर्ती कराए, फिर उसी दिन जिला अस्पताल में रात को भर्ती कराया गया। आक्सीजन लेवल एकदम कम होता गया और भर्ती होने के 1 घंटे के अंदर उसकी मृत्यु हो गई। अगर उसने 24 अक्टूबर को लक्षण दिखने के बाद जांच कराई होती तो उसकी जान बच सकती थी। छोटी सी लापरवाही, गैर जिम्मेदार व्यवहार से एक जान चली गई। यदि उसके परिजन भी जागरूक होते और टेस्ट कराने का दबाव डालते तो भी स्थिति शायद अलग होती और एक परिवार बेसहारा नही होता, इसलिए अभी सतर्कता अत्यधिक जरूरी है।
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