बीजापुर। वो कहते हैं ना जहां चाह वहां राह। यह कहावत हमें याद आयी जब हम ग्राम पंचायत अंगमपल्ली के यालम शंकर से मिले। आदिवासी बाहुल्य एक छोटे से गांव में पक्की छत के नीचे हंसता खिलखिलाता परिवार। यह परिवार अपने दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति कर गांव में काफी खुशी से रहता है। हम बात कर रहे हैं बीजापुर जिले के भोपालपटनम विकासखंड के ग्राम पंचायत अंगमपल्ली निवासी यालम शंकर की। यालम शंकर बताते हैं कि यह परिस्थिति पहले ऐसी नहीं थी। बांस-लकड़ी के सहारे बने खपरैल वाले झोपड़ी में पत्नी और दो पुत्र और बहू सहित गुजर-बसर कर रहे थे। दिन तो कट जाता पर बरसात के दिनों में रात डरावनी लगती थी। छप्पर से टपकता पानी रात को जागने पर विवश कर देती थी तथा जैसे-तैसे दिन गुजर रहे थे। मैने अपने परिस्थितियों के कारण अपने रिश्तेदारों के यहां आना-जाना छोड़ दिया था। क्योंकि मेरे घर यदि कोई मेहमान आता है तो मुझे चिंता बनी रहती थी कि को ठहराने की व्यवस्था कैसे करूंगा। यह स्थिति परिवार व समाज में मेरी छवि को खराब कर रहा था। मेरे पास कोई उम्मीद नहीं थी और में अक्सर सोचा करता था आवास का सपना कैसे पूरा करू क्योंकि जीवन की मूलभूत अवश्यकताओं रोटी, कपड़ा को पूर्ण करने में वक्त गुजर जाता है एैसे में अपना स्वयं का मकान कहां से पूर्ण करूं। एक गरीब व्यक्ति का मकान बनाने का सपना, सपना ही रह जाता है। फिर एक दिन मुझे ग्राम पंचायत सचिव के माध्यम से जानकारी प्राप्त हुई कि मेरा नाम प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में अंकित है और ग्राम सचिव के द्वारा मुझे पंजीयन हेतु दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, मनरेगाा जॉब कार्ड, खाता नंबर आदि जमा करने को कहा गया, जिससे मेरे द्वारा सभी कार्य समय-सीमा में पूर्ण कर जमा कर दिया गया। इसके पश्चात मेरे खाते में आवास निर्माण प्रारंभ करने के लिए राशि की प्रथम किश्त जारी की गई एवं आवास का निर्माण प्रारंभ हो गया आवास निर्माण के साथ ही किश्त की बाकी राशि भी मेरे खाते में आ गई आज मेरा आवास पूर्ण हो चुका है। यालम शंकर का कहना है कि शासन की एक महत्वपूर्ण योजना प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के द्वारा गरीब व्यक्तियों का आवास निर्माण हेतु सहायता उपलब्ध कराना मानो एक वरदान है। शासन हम गरीबों के लिए योजना बना रही है किंतु जानकारी के बिना हम उनका लाभ नहीं ले पा रहे हैं। मैंने अपने खेत में महात्मा गांधी नरेगा योजना से डबरी भी बना ली है। जो कि मेरे आवास के सामने स्थित है जिसमें मेरे द्वारा मछली पालन का कार्य किया जाता है अभी वर्तमान में डबरी में मछली बीज डाला गया है। जिससे मुझे अच्छी आमदनी होगी। यालम शंकर को क्रेडा से सिंचाई हेतु सोलर पैनल प्राप्त हुई है जिससे बिजली की समस्या से भी मुक्ति मिल गई है और स्वयं के नलकूप से डबरी में पानी भरने के लिए आसानी हो रही है। उज्जवला योजना से मुझे गैस चुल्हा भी प्राप्त हुआ है जिससे मेरे बहू को भोजन पकाने में सहूलियत होती है। यालम शंकर अब सक्षम हो चुके हैं और वह अपने बड़े पुत्र को ज्यादा पढ़ा नहीं पाये परन्तु उन्होंने अपने छोटे पुत्र को अच्छी शिक्षा देने को सोचा है वह अपने छोटे पुत्र को एक वकील बनाना चाह रहे हैं।

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